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अच्छा लगता है

सड़कों पर यह जाम अच्छा लगता है 
पटरी पर लौट रहा है काम अच्छा लगता है

सीएनजी के लिए पंप पर लगी वाहनों की कतार में इंतजार अच्छा लगता है।
बाजारों में मईया कर रही मोल भाव अच्छा लगता है

देश में कोरोना को हो रहा काम तमाम अच्छा लगता है।
टीका बनाकर भारत ने विश्व में कमा लिया नाम अच्छा लगता है। 

स्कूलों में कोरोना से बचने का है इंतजाम
बालकों की चहचहाहट से मैदान बना गुलफाम अच्छा लगता है। 

दिल झूमे फिर आई हैं मस्ती भरी शाम
डिस्कों में टकरा रहे हैं कांच भरे जाम अच्छा लगता है

चौक चौराहों पर हैं चर्चाएं हैं आम 
कोरोना के बाद निहाल ने कविता लिखकर कमाया नाम अच्छा लगता है। 




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मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

खबरों का संकलन 2021

 

कुछ ऐसा ही था हमारा जमाना

आओं तुम्हें बताऊं खेल पुराना कुछ ऐसा ही था हमारा जमाना टूटी हुई चप्पल के पहिए बनाना पंचर वाली टायर ट्यूब से उसके छल्ले लगाना दौड़ हमारी थी, लेकिन डंडी वाली गाड़ी का जीत जाना ईंट का घिस-घिस कर लट्टू बनाना फिर चीर की सुताई से उसको नचाना टक्कर मार- मार कर प्रतिद्वंदी का लट्टू हराना कुछ ऐसा ही था हमारा जमाना आओं तुम्हें बताऊं खेल पुराना टायर के साथ हाथ की थाप से दौड़ लगाना गुड्डा और गुड़िया का ब्याह करवाना  कबाड़े से गोला-पाक और बर्फ खाना कुछ ऐसा ही था हमारा जमाना बत्ती आने पर जोर से एक साथ शौर मचाना अंधरे में छुपन छिपाई का तो है खेल पुराना सोने से पहले चिराग को जोर वाली फूंक से बुझाना  बरसात में कागज की नांव बनाना फिर चींटे की उस पर सवारी कराना  सुबह शाम जब जंगल जाते थे जेब में रखकर आम और ककड़ी लाते थे अपने खेत में तरबूज होते हुए दूसरे के चुराना कुछ ऐसा ही था हमारा जमाना आओं तुम्हें बताऊं खेल पुराना बिन मौसम भी बाग में फल आते थे जब हम वहां खेल खेलने जाते थे  बगिया में वो खटिया पर नजर लगाना बाबा को परेशान कर भाग जाना तालाब- नदी में डुबकी लगाकर नहाना बैल भैंसिया की पूछ कर नदी पार  कर जाना प