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उस रावण को नहीं कलयुग के इस रावण को जलाने की जरूरत है

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हम हर साल दशहरा का त्योहार मनाते हैं। विजयदशमी वाले दिन अपने बच्चों के साथ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रावण को जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि हम रावण को क्यों जलाते है? उसका कसूर क्या था? यही कि उसने भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी मां सीता का पंचवटी से अपहरण किया था। 
वह भी किसलिए अपनी बहन की कटी नाक का बदला लेने के लिए, जिसे हम सिर्फ कहानियों में सुना करते हैं। लेकिन इस कलयुग के रावण का क्या जो एक अपराधी, भ्रष्टाचारी और बलत्कारी के रूप में हमारे अंदर है। आज देश की जनता अपराध, भ्रष्टाचार और बलात्कारी रूपी रावण से त्रस्त है। जिसको नष्ट करना हम सब की जिम्मेदारी बनती है।  हम उस रावण को सदियों से जलाते हुए आ रहे है जिसने मां सीता को छूने का दुस्साहस किया था। लंकापति रावण पापी था, अधर्मी, दुराचारी था, लेकिन बलत्कारी नहीं था। रावण का एक रूप और था। वह भगवान शंकर का पुजारी होने के साथ-साथ महाज्ञानी पंडित था। इन्हीं सब कारणों से माता सीता का अपहरण करके दो वर्ष तक अपनी कैद में रखने के पश्चात भी रावण ने माता सीता को छुआ तक नहीं था। रावण चाहता तो मां सीता के साथ जोर-जबरदस्ती कर स…