Skip to main content

हुजुर आते-आते बहुत देर कर दी








नई दिल्ली । बहुत देर से दर पे आँखें लगी थीं,हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी, मसीहा मेरे तूने
बीमार-ए-ग़म की दवा लाते-लाते बहुत देर कर दी। मशहूर हिन्दी फिल्म तवायफ के गाने के यह बोल दिल्ली भाजपा के साल के हिसाब पूरी तरह सटीक है। जी हां इस पूरे गाने दिल्ली भाजपा के पूरे साल का हिसाब चंदे सैंकड़ो में लगाया जा सकता है। क्योंकि दिल्ली भाजपा के लिए वर्ष 2016 आत्महत्या का साल रहा यां यू कह लिजिए कि अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाला साल रहा। हालांकि पार्टी के का दूसरा धड़ा मनोज तिवारी से कई उम्मीदें करके भी बैठा है । इस धड़े का मानना है कि तिवारी के आने से भाजपा को एक नई ऊर्जा मिलेगी और अगामी चुनाव में पार्टी को  जीत भी मिलेगी। क्योंकि पार्टी को पूर्वांचली कार्ड सफल होते दिखाई दे रहा है। मनोज तिवारी द्वारा की जा रही जनसभाओं में आने वाली भीड़ भी बढ़ गई है। पहले प्रदेश अध्यक्षों की भीड़ के लिए भाजपा को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता था, लेकिन पार्टी को लोगों का अपार जनसमर्थन मिल रहा है। 

खुद भाजपाईयों का मानना है कि  30 नवम्बर 2016 को दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की जगह मनोज तिवारी को बनाना देर से लिया गया फैसला साबित हो सकता है । क्योंकि इस फैसले में  पहले ही इतनी देर हो चुकी थी कि भाजपा दिल्ली में मई माह में हुए उप-चुनाव में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 की तरह निगम में भी तीन सीटों पर संतोष करना पड़ा। याद दिला दें कि मई में तीनों निगम की 13 सीटों पर उप-चुनाव हुआ था। जिसमें भाजपा को केवल 3 सीटों से संतोष करना पड़ा था। खास बात यह रही कि दिल्ली में तीसरे नम्बर की पार्टी गिनी जाने वाली कांग्रेस भी दूसरे नम्बर पर आकर खड़ी हो गई। सत्तारुढ आम आदमी पार्टी पहले स्थान पर वर्चस्व बनाने में कामयाब रही। हालांकि उप चुनाव नतीजों में भाजपा के लिए राहत की खबर वोट प्रतिशत रहा। तीन सीटें तीने के बाद भी भाजपा 34 फीसदी वोट लेकर भाजपा वोट प्रतिशत में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। यहां आम आदमी पार्टी को 29.93 वोट प्रतिशत वोट मिले थे। साथ ही कांग्रेस ने 24.87 वोट प्रतिशत के साथ जोर दार वापसी की थी। 
  1. - साल के आखिरी में अध्यक्ष बदलने का लिया फैसला
  2. - अगले साल निगम चुनाव में होगी मनोज तिवारी की परीक्षा
  3. - उप चुनाव में भी तीन में सिमट गई थी भाजपा


बॉक्स
जब तक फैसला हुआ तो बिखर चुकी थी पार्टी 
भाजपा आलाकमान ने 30 नम्बर को जब मनोज तिवारी को अध्यक्ष बनाकर भले ही पूर्वांचली राजनीति को दिल्ली में शिखर पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन तिवारी के अध्यक्ष बनाने तक दिल्ली भाजपा पूरी तरह बिखर चुकी थी। पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को वर्ष 2015 के जनवरी से बदलने की चर्चा थी। जिससे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में यह संदेश था कि अब जो भी करके दिखाना है वह नए अध्यक्ष के सामने करना है। इतने में कार्यकर्ता नए अध्यक्ष की रेस में चल रहे नेताओं की जी हुजुरी में लग गए। और दिल्ली में भाजपा काम ठप्प पड़ गया। न तो निगम के नेता सतीश उपाध्याय की सुनने को तैयार थे और न ही प्रदेश पदाधिकारी। जिसका खामियाजा यह हुआ निगम के उप चुनाव में पार्टी की गुटबाजी के नतीजे सामने आ गए। 

बॉक्स 

दिल्ली सरकार को बेनकाब करने में कामयाब हुए उपाध्याय

भले ही पार्टी में अकेलेपन की मार झेल रहे सतीश उपाध्याय को भाजपा ने अचानक हटा दिया। लेकिन बतौर अध्यक्ष रहते हुए दिल्ली भाजपा  दिल्ली की केजरीवाल सरकार को घेरने में सतीश उपाध्याय कामयाब रहे। दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर घोटाला हो, या अनाधिकृत कॉलोनियों का मुद्दा हो। उपाध्याय सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने में कामयाब रहे। वह धरने प्रदर्शनों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे। हालांकि अपने अंहकार की वजह से उन्हें पार्टी के बढ़े नेताओं की गुस्से का भी शिकार होना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वैज नहीं बदली। यही वजह रही कि आलाकमान ने उन्हें ऐसे समय पर हटाए जब सतीश उपाध्याय के अध्यक्ष बने रहने की चर्चाओं ने जोर पकड लिया। बतौर भाजपा विधायक विजेन्द्र गुप्ता भी सदन में सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्ष की उपस्थिती दर्ज कराता रहा। गुप्ता भी अपने नौकरशाही में अपने संबधों की वजह से दिल्ली सरकार को घेरने में कामयाब रहे। उन्होंने विधानसभा में टैंकर घोटाले को उठाया, जिसकी वजह से दिल्ली सरकार को टैंकर घोटाले की रिपोर्ट विधानसभा में पेश करनी पड़ी। जिसमें एसीबी में भी मामला दर्ज हुआ। 


हाईटैक नहीं हुई भाजपा
भले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ट्वीटर पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले पहले राजनेता हो, और वह तकनीक को राजनीति से जोड़कर लाभ लेने में पीछे नहीं रहते। लेकिन दिल्ली भाजपा तकनीक के तौर पर राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से तीसरी पार्टी बन गई है। एक ओर सत्तारुढ आम आदमी पार्टी (आप) सोशल मीडिया और तकनीकी टैक्टिस से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं, लेकिन दिल्ली भाजपा के कई पदाधिकारी ऐसे हैं जो सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं है। तीसरे नम्बर की पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस ने भी लाइव प्रेसवार्ताओं का प्रसारण शुरू कर दिया है, लेकिन भाजपा ने अभी तक इसके बारे में सोचा तक नहीं है। 

2017 होगा साबित करने वाला साल
केन्द्रीय स्तर के साथ-साथ दिल्ली भाजपा के लिए वर्ष 2017 अपने आप को साबित करने का साल रहेगा। बतौर अध्यक्ष बनने के बाद कलाकर मनोज तिवारी को टीम को साथ लेकर पूरी ऊर्जा को पार्टी के भलाई में लगाना होगा, ताकि वह निगम के होने वाले चुनाव में सत्ता को बरकरार रख सके। 



नए संगठन महामंत्री से मिल रही पार्टी को मजबूती
भाजपा के लिए वर्ष 2016 बदलाव भरा भी रहा। एक ओर साल के आखिर में पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष को बदला तो इससे पहले पार्टी में आए पूर्व वर्ष 2015 संगठन महामंत्री विजय शर्मा को बदलते हुए पार्टी ने दक्षिणी भारत के संघ कार्यकर्ता सिद्धार्थन को भी प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सौंप दी। जिससे पार्टी को एक नई दिशा भी मिलती दिखाई दे रही है। सिद्धार्थन का पूरी दिल्ली में अपने संपर्क है, क्योंकि बतौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस)प्रचारक वह सभी विभागों में काम कर चुके हैं। उन्हें हर जिले और मंडल व नगर के समर्पित कार्यकर्ताओं की पहचान है। जिससे संगठन को खड़ा करने में मजबूती मिलने के आसार है। उनके इस प्रभाव से ही पार्टी में गुटबाजी भी काफी होती दिखाई दी है।
समर्पण को मिला ईनाम
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति भी भाजपा ने साल के आखिर में की। जिससे पार्टी में अपनी आस्था रखने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी ने जिलाध्यक्ष नियुक्त करके उनके समर्पण का ईनाम दे दिया। इसमें ऐसे नए लोगों को जगह दी गई जो कि पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम करते रहें। पार्टी ने गुटबाजी को खत्म करते हुए पेराशूट उम्मीदवारी को खत्म करने का फैसला लिया। जिससे केवल उन्ही लोगों को जिम्मेदारी दी जाएगी जो केवल काम करके दिखाएंगे। माना जा रहा है कि प्रदेश टीम में होने वाली नियुक्ति में भी इसी नियम का असर दिखाई देगा। वहीं वर्ष 2017 में होने वाले निगम चुनाव में भी इसी नियम को फॉलो किए जाने की पूरी संभावना है।
- निहाल सिंह, साभार : पंजाब केसरी


Comments

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

दिल्ली वालों का दिल हुआ स्मार्ट

-पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय और स्मार्ट बाइक करती है यहां आकर्षित -अॉनलाइन मिल जाती है पार्किंग की जानकारी   वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने देशभर में 100 स्मार्ट सिटी (smartcitydelhi) बनाने की घोषणा की गई थी। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (NDMC) इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। इसके तहत इस इलाके में स्वच्छ पेयजल के साथ, स्मार्ट सड़कें, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और इलाके का सुंदरीकरण किया जाना था। डिजीटल तकनीकी के सहारे यहां के निवासियों की जिंदगी को अासान बनाना था। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद एनडीएमसी ने यहां साईकिल किराये पर देने से लेकर, स्मार्ट एलईडी स्क्रीन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं को शुरू किया है। पर यह अभी आधा सफर है, पूरा सफर अभी बाकि है।   एनडीएमसी इलाके को स्वच्छता के लिए जाना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में यह अभी तक पहले स्थान पर नहीं आ पाया है। झुग्गी बस्तियों में अब भी गंदगी की समस्या है। इतना ही नहीं, कई झुग्गी बस्तियाें में अभी तक पानी की पाइप लाइन

खबरों का संकलन 2019-2020