सिग्नेचर ब्रिज : आखिरकार पकने लगी बीरबल की खिचड़ी...

पर्यटन विभाग कर रहा है हर सप्ताह रिव्यू
-     तेजी से हो रहा है काम, 1600 करोड़ पहुंचा बजट
नई दिल्ली (निहाल सिंह) दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज निर्माण में तारीख पर तारीख दिए जाने का समय अब खत्म हो गया। तेजी से हो रहे काम के चलते सिग्नेचर ब्रिज के शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। सरकार की माने तो इस साल के अंत तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। ब्रिज के शुरू होने के बाद दिल्ली के न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ब्रिज से गुजरने वालों को दिल्ली का सुंदर नाजारा भी देखने को मिलेगा। पाइल 23 का काम पूरा होने के बाद अब विभाग वैलकैप का काम शुरू करने वाला है। वैलकैप के तहत दोनों प्लरों को जोड़ा जाएगा।
दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण में पाइल 23 की समस्या आ रही थी, जिसे विभाग ने पिछले दिनों सुलझा दिया है। अब वैलकैपिंग का कार्य किया जा रहा है। कपिल मिश्रा ने उम्मीद जताई की ऩए साल के तौहफे में दिल्ली वालों को सिग्नेचर ब्रिज सौंप दिया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद सिग्नेचर ब्रिज के काम में तेजी आसानी से देखी जा सकती है। पहले ऐसे लगता था कि सिग्नेचर ब्रिज केवल एक सपना भर बनके रह जाएगा। लेकिन सरकार में आने के बाद हमने इस काम को गंभीरता से लिया है और युद्धस्तर पर हर काम को बखूबी किया जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि हम काम जल्दी करना चाहते हैं, लेकिन सभी सावधानियों को ध्यान में रखकर। क्योंकि अगर छोटी सी गलती बहुत बड़ी परेशानी बन सकती है।

 केजरीवाल सरकार का भी ड्रीम प्रोजेक्ट बना सिग्नेचर ब्रिज

पूर्ववर्ती कांग्रेस शासित शीला सरकार द्वारा शुरू किया गया महत्वकांक्षी सिग्नेचर ब्रिज प्रोजेक्ट अब केजरीवाल सरकार का भी ड्रीम प्रोजेक्ट बन गया है। शायद यही वजह है कि सिग्नेचर केजरीवाल सरकार के लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतेन्द्र जैन और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा इस पर पल-पल की खबर रख रहे हैं। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए साप्ताहिक बैठक भी शुरू की हुई है।  बता दें कि यमुना नदी पर 1997 बस हादसे में मारे गए बच्चों की स्मृति में बन रहा है। विदेशी तकनीक पर बन रहे ब्रिज में 150 मीटर ऊंचे टावर स्टील के  बने हैं। टावर के साथ-साथ यमुना पर बनने वाले पुल के लिए 250 मीटर लंबा स्पैन होगा जिसमें 8 लेन होंगी। टावर को वजीराबाद बैराज के सामने दो बड़े पिलरों पर खड़ा किया जाएगा।


यह देश का ऐसा पहला सिंगल पाइलन ब्रिज होगा जिसके बीच के सिरे के एक तरफ  का बैलेंस 18 मोटी केबलों से सधा होगा और उसके नीचे कोई पिलर नहीं होगा और दूसरी ओर मात्र चार केबले होगी। यह पूरा ब्रिज स्टील का बना हुआ और तारों से झूलता हुआ होगा। हाई तकनीक से बन रहा यह ब्रिज पूरी तरह से भूकंपरोधी होगा। ब्रिज के बीचोंबीच बनने वाले मेहराब की ऊंचाई 154 मीटर की होगी और उसके ऊपर विशेष प्रकाश व्यवस्था होगी ताकि रात मे वह दूर से भी दिखाई दे।  सरकार का मानना है कि पर्यटकों को कैलीफोर्निया व शंधाई की तरह दिल्ली में भी गगनचुंबी टावर पर आकर्षक सिग्नेचर ब्रिज लहराता दिखाई देगा। जिस तरह से विदेशों में लिबर्टी ऑफ स्टेचू, क्वीन टावर, लंदन ब्रिज आदि है वैसे ही आने वाले समय में सिग्नेचर ब्रिज नई कलात्मक पहचान बनेगा। जो कि दिल्ली क्या भारत की नई पहचान बनेगा। ब्रिज के निर्माण की जिम्मेदारी गैमन इंडिया की है और कंपनी ब्राजील, इटली की कंपनी के साथ ज्वांइट वेंचर के रूप में इस पुल का निर्माण कर रही है।
सिग्नेचर ब्रिज की रूपरेखा वर्ष 2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के देखते हुए बनाई गई थी। सरकार की कोशिश थी कि राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इसको शुरू करके विदेशों से आए पर्यटकों का मनमोह लिया जाए। लेकिन कई कारणों से यह काम केवल कागजों पर बनकर रह गया था। वर्ष 2004 में कांग्रेस की सरकार ने सिग्नेचर ब्रिज बनाने का फैसला लिया था। उस समय इसकी लागत 450 करोड रूपए रखी गई थी। इसके बाद इसके डिजाइन को परिवर्तिंत करके इसे माइल स्टोन के रूप में परिवर्तित किया गया। जिसका बजट 1100 करोड़ रूपए कर दिया गया। लेकिन अब इसका बजट 1600 करोड़ रूपए पहंच गया है।

साभार: पंजाब केसरी

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