Skip to main content

दिल्ली केंदित मीडिया होना विकास के लिए खतरा...

अब कहा है रवीश कुमार

पत्रकारिता में दाखिला लिया था, उस दौरान दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। तो पूरे दिन सभी समाचार चैनलों पर दिल्ली की यमुना की तस्वीर यमुना में बोट लेकर पत्रकारों द्वारा जल का बहाव दिखाने की कोशिश, यमुना में बहकर आ रही सब्जियां जैसी खबरे खूब दिखाई जा रही थी। चूंकि मैं पत्रकारिता का छात्र था तो उस दौरान कई दूसरे क्लासमेट अन्य राज्यों से पढ़ने आए थे। उस समय में खबरों का आकलन करने की सोच धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। जो दोस्त बाहर से पढ़ने आए थे वह इतने घबराएं हुए नहीं थे, जितने उनके माता पिता घबराए हुए थे। रोजाना दोस्तों को हर तीसरे चौथे घंटे पर फोन आता था कि बाढ़ का पानी कही तुम्हारे घर के पास तो नहीं पहुंचा, अगर ऐसा कुछ हैं तो वापस घर आ जाओं जब बाढ़ चली जाएगी तो वापस चले जाना। मेरे दोस्त कभी हंसते हुए तो कभी गंभीरता से अपने अभिभावकों को विश्वास दिलाते कि उन्हें कुछ नहीं होगा। उस समय समझ आया कि एक माता पिता के लिए अपने बच्चे को दूसरे राज्य में पढाई के लिए भेजना कितना चिंता करने वाला काम होता है। खैर लेकिन बारिश बंद हुए बाढ़ नहीं आई। हा शास्त्री पार्क के कुछ मकानों पर घुटने भर का पानी आ गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ कि पूरी दिल्ली बाढ़ से ठप्प हो गई है। मुश्किल से मुश्किल 30-40 हजार अंदाजन लोग इस बाढ से प्रभावित हुए होंगे।
दूसरी घटना पत्रकारिता की पढाई पूरी करने के बाद वर्ष 2013 में देखने को मिली उस समय मैं भी सक्रिय रूप से पत्रकारिता में आ गया था। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजैंसी में काम कर रहा था, और दूसरी ओर मेरा नवोदय टाइम्स की लांचिंग से पहले ज्वाइनिंग की तैयारी कर रहा था। उस दौरान भी दिल्ली में बाढ़ आई। नवोदय टाइम्स के लिए मैने बाढ़ प्रभावितों से बातचीत करके खूब खबरें की। उस समय चूंकि ज्वाइनिंग नहीं हुई थी तो खबरों पर नाम नहीं छप रहा था, लेकिन कुछ दिनों ज्वाइनिंग की प्रक्रिया भी पूरी हो गई और खबरों पर नाम  भी छपने लगा। चलिए मान लिया की मैंने दिल्ली के अखबार होने के नातें दिल्ली की घटना की जानकारी अपने समाचार पत्र के लिए एकत्रित की। लेकिन क्या राष्ट्रीय चैनलों की इतनी जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वह राष्ट्रीय खबरों को प्रमुखता से दिखाएं। कल रात को समाचार देख रहा था, जिसमें पूर्वोत्तर के असम गुवाहाटी में आई बाढ़ की खबर को रात के बुलेटिन में करीब 30 सैंकेड की जगह मिली।  मैं हैरान तो नहीं था लेकिन मन में चिंता जरूर हुई की अब हमारा मीडिया कितना दिल्ली केंद्रित हो गया है। चाहे चुनाव हो या फिर सामाजिक समस्या दिल्ली की ज्यादा कवर की जाती है। अगर यही खबरें अगर पूर्वोत्तर और दक्षित भारत से आएं तो उन्हे रात के बुलेटिन में जगह दी जाती है।  मैं चिंतित था कि समाज को आईने दिखाने वाले समाचार चैनलों के लिए पूर्वोत्तर या दक्षिण भारत की खबरों को कितना गंभीरता से लेते है। क्योंकि वहां चैनल वालों को बाजारी लाभ नहीं मिलता। जो मीडिया चैनल दिल्ली के यमुना के थोड़े से पानी बढ़ने को लेकर अपनी छाती पीटता है वह एक लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित करने वाली असम के गुवहाटी की बाढ़ को केवल औपचारिकता मात्र की खबरों में जगह देता है। दिल्ली से कोई भी रिपोर्टर वहां कवर करने नहीं जाता है। अगर दिल्ली में बाढ़ आ जाती है तो खुद एनडीटीवी के तथाकथित भेड़ चाल से अलग चलने वाले रवीश कुमार भी नांव में बोट लेकर हाल दिखाना शुरू कर देते है। लेकिन गुवहाटी की बाढ़ में यह नजर नहीं आए। जहां पर एक एक मंजिल से ऊपर पानी घरों में घुस गया है। लोगों के लिए खाने के लाले पड़े है।  मेरा मानना है कि ऐसा करना समाचार चैनलों के लिए ऐसा करना देश के विकास के घातक है। क्योंकि जब देश के सीमावर्ती राज्यों की जानकारी राष्ट्रीय मीडिया में नहीं आएगी,तो उससे उन राज्यों में रहने वाले लोगों में हीन भावना आएगी।

Comments

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

दिल्ली वालों का दिल हुआ स्मार्ट

-पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय और स्मार्ट बाइक करती है यहां आकर्षित -अॉनलाइन मिल जाती है पार्किंग की जानकारी   वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने देशभर में 100 स्मार्ट सिटी (smartcitydelhi) बनाने की घोषणा की गई थी। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (NDMC) इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। इसके तहत इस इलाके में स्वच्छ पेयजल के साथ, स्मार्ट सड़कें, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और इलाके का सुंदरीकरण किया जाना था। डिजीटल तकनीकी के सहारे यहां के निवासियों की जिंदगी को अासान बनाना था। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद एनडीएमसी ने यहां साईकिल किराये पर देने से लेकर, स्मार्ट एलईडी स्क्रीन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं को शुरू किया है। पर यह अभी आधा सफर है, पूरा सफर अभी बाकि है।   एनडीएमसी इलाके को स्वच्छता के लिए जाना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में यह अभी तक पहले स्थान पर नहीं आ पाया है। झुग्गी बस्तियों में अब भी गंदगी की समस्या है। इतना ही नहीं, कई झुग्गी बस्तियाें में अभी तक पानी की पाइप लाइन

खबरों का संकलन 2019-2020