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Showing posts from July, 2016

सिग्नेचर ब्रिज : आखिरकार पकने लगी बीरबल की खिचड़ी...

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पर्यटन विभाग कर रहा है हर सप्ताह रिव्यू
-     तेजी से हो रहा है काम, 1600 करोड़ पहुंचा बजट नई दिल्ली (निहाल सिंह) दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज निर्माण में तारीख पर तारीख दिए जाने का समय अब खत्म हो गया। तेजी से हो रहे काम के चलते सिग्नेचर ब्रिज के शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। सरकार की माने तो इस साल के अंत तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। ब्रिज के शुरू होने के बाद दिल्ली के न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ब्रिज से गुजरने वालों को दिल्ली का सुंदर नाजारा भी देखने को मिलेगा। पाइल 23 का काम पूरा होने के बाद अब विभाग वैलकैप का काम शुरू करने वाला है। वैलकैप के तहत दोनों प्लरों को जोड़ा जाएगा। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण में पाइल 23 की समस्या आ रही थी, जिसे विभाग ने पिछले दिनों सुलझा दिया है। अब वैलकैपिंग का कार्य किया जा रहा है। कपिल मिश्रा ने उम्मीद जताई की ऩए साल के तौहफे में दिल्ली वालों को सिग्नेचर ब्रिज सौंप दिया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद सिग्नेचर ब्रिज के काम में तेजी आसानी से देखी जा सकती है। पहले ऐसे लगता था कि सिग्नेचर ब्र…

दिल्ली केंदित मीडिया होना विकास के लिए खतरा...

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अब कहा है रवीश कुमार पत्रकारिता में दाखिला लिया था, उस दौरान दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। तो पूरे दिन सभी समाचार चैनलों पर दिल्ली की यमुना की तस्वीर यमुना में बोट लेकर पत्रकारों द्वारा जल का बहाव दिखाने की कोशिश, यमुना में बहकर आ रही सब्जियां जैसी खबरे खूब दिखाई जा रही थी। चूंकि मैं पत्रकारिता का छात्र था तो उस दौरान कई दूसरे क्लासमेट अन्य राज्यों से पढ़ने आए थे। उस समय में खबरों का आकलन करने की सोच धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। जो दोस्त बाहर से पढ़ने आए थे वह इतने घबराएं हुए नहीं थे, जितने उनके माता पिता घबराए हुए थे। रोजाना दोस्तों को हर तीसरे –चौथे घंटे पर फोन आता था कि बाढ़ का पानी कही तुम्हारे घर के पास तो नहीं पहुंचा, अगर ऐसा कुछ हैं तो वापस घर आ जाओं जब बाढ़ चली जाएगी तो वापस चले जाना। मेरे दोस्त कभी हंसते हुए तो कभी गंभीरता से अपने अभिभावकों को विश्वास दिलाते कि उन्हें कुछ नहीं होगा। उस समय समझ आया कि एक माता पिता के लिए अपने बच्चे को दूसरे राज्य में पढाई के लिए भेजना कितना चिंता करने वाला काम होता है। खैर लेकिन बारिश बंद हुए बाढ़ नहीं आई। हा शास्त…

सबसे आगे हम

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खबर की सॉफ्ट कॉपी
देश और विदेश में राजधानी दिल्ली की छवि सुधारने के लिए दिल्ली सरकार जुलाई के मध्य में भिखारी मुक्त अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत न केवल भिखारियों को पकड़ा जाएगा, बल्कि भिखारियों का पुर्नउद्धार हो सकें इसके लिए विशेष अभियान भी सरकार चलाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली का सामाजिक कल्याण विभाग ने भिखारी मुक्त अभियान की योजना तैयार की है। जिसके पहले चरण की कड़ी में जुलाई में शुरू किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि भिखारी मुक्त अभियान के लिए दिल्ली सरकार ने विशेष अभियान चलाऩे का फैसला लिया है। जिसके जरिए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भिखारियों को पकड़ा जाएगा। दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री संदीप जैन दिल्ली के कनाट पैलेस में इस अभियान का शुंभआरंभ करेंगे।इसके लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली सरकार ने सात टीमें गठित की है। यह टीमें दिल्ली के विभिन्न इलाकों मे जाकर भिखारियों को पकड़ेगी। सूत्रों ने बताया कि अभियान का पहला चरण परिक्षण के आधार पर चलेगा। अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो आगे भी यह जारी रहेगा।
समाज कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी…

अब चैन की लंबी-लंबी सांस ले उपाध्याय

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आज का दिन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के लिए चैन की सांस लेने का है। अभी आपकों समझ नहीं आया होगा। लेकिन मैं आपको समझाने की कोशिश करता हू। समझ आए तो नीचे प्रतिक्रिया बॉक्स में कमैंट और शेयर के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। आईए अब में आपको समझाता हूं कि आज से उपाध्याय क्यों चैन की सांस ले सकते है। और यह चैन की सांस 10 अशोका रोड़ से होते हुए 14 पंडित मार्ग तक पहुंच रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले तीन-चार माह से दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुए विजय गोयल अब केन्द्र में आज राज्य मंत्री बन गए है। विजय गोयल की सक्रियता से न केवल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के पहिए ढीले हो गए थे बल्कि पूरा डी4 चिंता में पड़ गया था। आए दिन विजय गोयल की गतिविधियों को देख दिल्ली भाजपा सत्ता रूढ केजरीवाल से जितनी डरती नहीं थी, जितना डर अपने ही भाजपा सांसद विजय गोयल से भाजपा को लग रहा था। प्रदेश अध्यक्ष और डी-4 को चिंता थी,अगर विजय गोयल प्रदेश अध्यक्ष बन गए तो उनका क्या होगा। जिसकी वजह डी4 विजय गोयल को गरियाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। खैर अब तो विजय गोयल केन्द्र की राजनीति में पहुंच गए हैं तो डी-4 की मुश्कि…