Skip to main content

स्कूल में जाने का मन करता हैं...

कल दोपहर के 12.00 बजे अपने स्कूल के सामने से गुजरा तो एक एक एहसास अलग था।.. क्योकि यह एक पहला समय था जब लंबे अंतराल के बाद स्कूल की छुट्टी के समय स्कूल के सामने से गुजरा था... वही पुरानी बात थी रोड़ पर ट्रैफिक जाम था। सुबह की शिफ्ट की लड़किया छुट्टी होने के बाद अपने अपने घर जा रही थी। लड़के लड़कियों का स्कूल से निकलने का इँतजार कर रहे थे। स्कूल के बाहर जलजीरे वाला और कोल्डडि्क वाला तो नही था, लेकिन याद वहीं आ रही थी। बच्चों को बाहर निकलते देख स्कूल के अंदर जाने की इच्छा हुई ,लेकिन काम से कही जाना था तो नहीं जा पाया, लेकिन जहां जा रहा था वहां तक पहुंचने तक बाइक चलाते समय स्कूल के पुरानी यादें मन में चल रही थी।
वो यादे कुछ ऐसी थी...
... लड़कियों की छुट्टी होने से पहले स्कूल पहुंच जाना और क्लास में पहली डेस्क हथियाने के लिए रोज नए हथकंडे अपनाना
---- जल्दी पहुंचकर डेस्क पर बस्ता रखकर डेस्क के फट्टे का बल्ला निकालना और फिर खेल के मैदान की ओर विकेट घेरने के बाद खेलने का दावा करना
---पीटीआई के सीटी बजाने तक और लाइन लग जाने तक आखिरी बोल तक खेलना। फिर चुपचाप फ्ट्टा (बल्ला) रेत में छिपाकर रख देना और फिर कड़ी घूप में दोपहर एक बजे प्रार्थना में खड़े होना।
--- लाइन में सबसे आगे लगना और फिर क्लास में जल्दी जाने के लिए स्कूल के मंच पर जाकर हाजिरी के लिए गिनती बोलना (इससे दो लाभ होते थे,एक तो टीचर अच्छा बच्चा मानते थे और दूसरा धूप से जल्दी निजात मिल जाती थी )
--- क्लास में पहुंचकर घर से ले जाया हुई बर्फ की बोतल निकाल कर पानी पीना-- क्योंकि सब बच्चे आने के बाद सबको पानी ठंडा पिलाना पड़ता था स्कूल में पानी नहीं आता था.
- दो साल तक तो बिना पंखे औऱ बिना लाइट वाली क्लास में बैठना
--फिर लंच का इंतजार करना और उस 15 मिनट में 3 ओवर के मैच को पूरा
करना
आगे की कहानी जानने के लिए क्लिक करें www.aatejate.blogspot.in
मेरा प्यारा राजकीय सर्वोदय बाल विद्यालय - वेस्ट विनोद नगर

Comments

  1. I was a student of this school . From 2008 to 2015 ..I have many sweet memories of this School .I miss it

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

दिल्ली वालों का दिल हुआ स्मार्ट

-पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय और स्मार्ट बाइक करती है यहां आकर्षित -अॉनलाइन मिल जाती है पार्किंग की जानकारी   वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने देशभर में 100 स्मार्ट सिटी (smartcitydelhi) बनाने की घोषणा की गई थी। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (NDMC) इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। इसके तहत इस इलाके में स्वच्छ पेयजल के साथ, स्मार्ट सड़कें, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और इलाके का सुंदरीकरण किया जाना था। डिजीटल तकनीकी के सहारे यहां के निवासियों की जिंदगी को अासान बनाना था। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद एनडीएमसी ने यहां साईकिल किराये पर देने से लेकर, स्मार्ट एलईडी स्क्रीन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं को शुरू किया है। पर यह अभी आधा सफर है, पूरा सफर अभी बाकि है।   एनडीएमसी इलाके को स्वच्छता के लिए जाना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में यह अभी तक पहले स्थान पर नहीं आ पाया है। झुग्गी बस्तियों में अब भी गंदगी की समस्या है। इतना ही नहीं, कई झुग्गी बस्तियाें में अभी तक पानी की पाइप लाइन

खबरों का संकलन 2019-2020