Skip to main content

भाई कोई मरे तो मुझे जरुर बताना

- चुनावी तिकड़म के चलते शमशान घाटों और जागरणों में हाजिरी लगा रहे हैं नेताजी
- रोजाना 4-5 क्रियाओं में शामिल होने लगे नेताजी
- विधानसभा लडऩे के लिए स्थानीय लोगों को जोडऩे की नई तिकड़म अपना रहे हैं दिल्ली के नेता
नई दिल्ली, (निहाल सिंह): दिल्ली में चुनावों की आहट के साथ ही, नेताजी इलाके में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, हालात यह हैं कि नेताजी ने अपने चंपूओं को आदेश दिया है कि इलाके में किसी की भी मृत्यु होने पर उन्हें तुरन्त बताया जाए। नेताजी किसी की मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरन्त शोक स्थल पर जा बैठते हैं।
सूत्रों की मानें तो इसके लिए नेताजी बकायदा अपना भेष भी कुछ ऐसा बनाते हैं, कि शोकाकुल परिवार को लगे की जैसे नेताजी खबर मिलते ही सबसे पहले उनके ही घर आ गए हैं।
चुनाव से पहले अपने आकाओं के सामने हाजिरी लगाने वाले नेता अचानक से अर्थियों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं। आलम यह है कि नेताजी सुबह शाम शमशान घाटों, कब्रिस्तानों में नजर आने लगेे हैं।
भाजपा, कांग्रेस सहित आम आदमी पार्टी  के नेता भी इस चुनावी तिकड़म को भिड़ा रहे हैं। कहीं-कहीं तो चौंकाने वाली स्थिति नजर जाती है। आमतौर पर कई चक्कर लगाने के बाद भी न उपलब्ध  हो पाने वाले नेताजी अपने प्रतिद्वंदियों के साथ शमशान घाट में नजर आते हैं।  
नेताजी की संवेदनशीलता का आलम यह है कि अपनी-अपनी विधानसभा में नेताजी ने अपने कुछ चंपूओं को मौत, क्रिया, जागरण, भजन संध्या पर खास नजर रखने के निर्देश दिए हंै। वहीं कुछ नेताओं का हाल तो यह है कि पार्टी दफ्तर पहुंचने से पहले भी अगर कोई मौत की खबर आ जाती है तो नेताजी वहीं से अपनी गाड़ी मुड़वा लेते हैं। और अपने चंपूओं से बस शमशान घाट का नाम पूछते हैं। खास बात यह है कि नेताजी की कार में शोक सभा में जाने का भी पूरा इंतजाम रहता है। जैसे ही नेताजी को मौत की खबर मिलती है नेताजी गाड़ी में ही सूट-वूट उतारकर अपने पुराने कुचड़े-मूचड़े कपड़ों को पहन लेते हैं। अगर नेताजी को पता चलता है कि शोकाकुल परिवार का इलाके में काफी प्रभाव है तो नेताजी घडिय़ाली आंसू भी बहाने में पीछे नहीं रहते।
वहीं कुछ नेताओं ने अपने चंपूओं को उनके ऑफिस में जागरण और शोक सभाओं के कार्ड देने आने वालों को खास तरह का ट्रीटमैंट देन का निर्देश भी दे रखा है। नाम न छापने की शर्त पर एक नेताजी का कहना है किसी के सुख दुख में शामिल होने से परिवार को दुख सहने की शक्ति मिलती है। लेकिन जानकार बताते हैं कि किसी शोक सभा, क्रिया, जागरण में जाने से स्थानीय लोग नेताजी से आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं, जिसका फायदा नेताजी को चुनाव में मिलता है।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

एक पत्रकार की शादी का कार्ड

जैसा कि आपकों पता है कि गत वर्ष 26 नवम्बर 2015 को मेरी शादी हुई। वैसे तो हर प्रोग्राम में इंशान के खट्टे मीठे पल होते हैं। लेकिन बात जब शादी की हो तो केवल मीठे पल ही याद रखने चाहिए। क्योंकि दोस्तों का कहना है कि शादी के बाद खट्टे पल ही नजर आते हैं। हालांकि अभी तक तो जिंदगी बहुत सुंदर चल रही हैं। मैं और मेरी धर्मपत्नी नीलम एक दूजे से बहुत खुश है। यह तो रही शादी के बाद की बात अब आपकों शादी से पहले की ओर ले चलता हूं। शादी तय हो गई थी। परिवार की रजामंदी और मेरी पंसद से नीलम के साथ मेरा विवाह हुआ। वर्ष 2015 के 5 मार्च को हम दोनों ने एक दूसरे को पूर्वी दिल्ली के नीलम माता मंदिर में देखा था। और देखने के बाद मेरे परिवार और मुझे भी नीलम पंसद आ गई थी। इसके बाद शादी की तैयारियां शुरू हो गई थी। सबसे पहले की रस्म थी। रोके की रस्म । यह रस्म भी खूब धूमधाम से मनाई गई। मैं और मेरा परिवार नाते रिश्तेदारों के साथ 20 अप्रैल को नीलम के निवास पर गोद भराई अर्थात रोके की रस्म के लिए गए। यहां हम दोनों ने समाज के सामने एक दूजें को अगुठियां पहना कर अपना लिया। इसके बाद बातों का सिलसिला चला और शादी की तैयारिया श…

RTI FORMAT- आरटीआई प्रथम अपील के आवेदन का प्रारुप

मित्रों आप जब किसी विभाग में आरटीआई फाईल करे और आपको 30 दिनों के भीतर जवाब न मिलें तो आप इस तरह के प्रारुप का इस्तेमाल करके प्रथम अपील फाईल कर सकते है।
-------------------------------------------------------------------------
-- प्रारुप को देखने के बाद सुझाव आमत्रित है..
=================================================

सेवा में,                                                               दिनांक......................... प्रथम अपीलीय अधिकारी, .......विभाग का नाम और पता........................... .................................... विषय- सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19 के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी के समझ अपील। मान्यवर, मैने आपके कार्यलय में दिनांक ......................... को कुछ सूचनाओं के लिए आवेदन दिया था । मान्यवर आवेदन के संबध में सूचना अधिकारी महोदय द्वारा जो सूचनाए उपलब्ध कराई गयी है वह अधूरी व अस्पष्ट है। साथ ही इन सूचनाओं से मै संतुष्ठ नही हूं। कृपया करके मुझे स्पष्ट व पूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराने का कष्ट करें। मूल आवेदन की छाया प्रति संलग्न है।                                      …

फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज,बन सकता है जिंदगी भर का दर्द

निहाल सिंह । नई दिल्ली। युवा कामकाजी प्रोफेशनल 25 वर्षीय प्रिया कुकरेजा ने इस उम्र में अप्रत्याशित स्वास्थ्य समस्या के बारे में कभी नहीं सोचा था जब तक कि वह दुर्घटनावश बर्फ पर फिसल नहीं गई और उसकी कोहनी टूट नहीं गई। प्रिया ने इसे हल्के में लिया। शुरु में दर्द नहीं हुआ,लेकिन बाद में टूटी हड्डी की जगह सूजन आने से परेशानी बढ़ गई। जबतक वह आर्थोपेडिक डॉक्टर के पास गई तबतक नुकसान हो चुका था। उसके कोहनी में हड्डी गलत जगह से जुड़ने की वजह से उसके हाथ टेढ़े हो गए। जब इस युवा महिला की जांच की गई तो एक्स-रे में हड्डी के कई टुकड़े के साथ जटिल फ्रैक्चर पाया गया। उसकी दाहिनी कोहनी में दर्द, सूजन भी थी और उसे हिलाना- डुलाना मुश्किल था। उसकी कोहनी का एक जटिल अपरेशन किया गया और हड्डी के टुकड़ों को विशेष  प्लेट और स्क्रू से फिक्स किया गया। इस प्रक्रिया के तीन महीने बाद, वह अब सामान्य रूप से अपने हाथ को हिलाने - डुलाने में सक्षम है। यदि समय रहते इलाज किया जाता तो प्रिया को इतना परेशान होने की जरुरत नहीं थी। फ्रैक्चर को न लें हल्के में फोर्टिस अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग के अध्यक्ष डॉ जीके अग्रवाल कहते …