Skip to main content

मुफ्त इलाज से पहले ही कट जाती है मरीजों की जेब




-इलाज मुफ्त पर पार्किंग शुल्क से परेशान रहते है मरीज
- अस्पतालों के बाहर पार्किंग शुल्क से परेशान मरीज
-
घंटे के हिसाब से लिया जाता है पार्किंग शुल्क
नई दिल्ली २६ अप्रैल (निहाल सिंह) दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज देने के बावजूद मरीजों की जेब काटी जा रही है। इलाज शुरु होने से पहले ही मरीजों को अस्पताल में दाखिल होने का शुल्क चुकाना पड़ता है। यमुनापार के अस्पतालों में पार्किंग के नाम पर मरीजों से समय-सीमा के तहत पैसे वसूले जा रहे हैं। गुरूतेग बहादुर (जीटीबी) और हेडग़ेवार आरोग्य संस्थान में भले ही मुफ्त इलाज की सुविधा है, लेकिन मरीजों को पार्किंग के लिए दस रुपए से लेकर पचास रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह राशि तब दोगुनी हो जाती  है जब अस्पताल के आस- पास स्थित दवा की दुकानों में मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाईयां नहीं मिलती।

चुनकर उठाकर ले जाते हैं वाहनपूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार गुरूतेग बाहदुर और हेड़गेवार आरोग्य संस्थान में पार्किंग शुल्क परेशानी का सबब बना हुआ है। इन अस्पतालों में अगर मरीज या उनके रिश्तेदार पार्किंग शुल्क न दे तो उनकी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस के वाहन चुनकर उठाकर ले जाते हैं। जीटीबी अस्पताल में अपनी भाभी को देखने आए प्रकाश ने बताया कि अस्पताल में वह तीन में तीन बार किसी न किसी काम से अपने मरीज के पास आए तो तीनों बार उन्हें पार्किंग की फीस चुकानी पड़ी। वहीं दूसरे एक अन्य मरीज के रिश्तेदार रोशन का कहना है कि वह लम्बे समय से देख रहे कि जो लोग पार्किंग न देकर पार्किंग स्थल वाली जगह पर पार्किंग लगाते हैं उनकी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस वाले चुन- चुन कर उठाकर ले जाते है। उनका कहना था एक तो वह अपने मरीज का इलाज बड़ी मुश्किल से करवा पा रहे दूसरी और बार – बार पार्किंग के नाम पर वसूली से उन्हें काफी परेशानी होती है। रोशन का कहना था कि अस्पताल में कम से कम मरीज के साथ एक व्यक्ति को पार्किंग की निशुल्क सेवा मिलनी चाहिए।
गेट बंद करके वसूली जा रही है पार्किंगकड़कड़डूमा हेडगेवार आरोग्य संस्थान में पार्किंग माफिया का इस तरह से कब्जा है कि यहां अस्पताल का गेट बंद करके उसके सामने खुले आम अवैध पार्किंग लगवाई जा रही है। अस्पताल के गेट एक गेट को बंद करके या पार्किंग का शुल्क वसूला जा रहा हैं। नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के एक कर्मचारी का कहना है कि यह गेट अस्पताल के आपातकाली वार्ड को जोड़ता है, लेकिन यहा पार्किंग लगना अस्पताल प्रशासन से मिली भगत को दर्शाता है।

Comments

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

दिल्ली वालों का दिल हुआ स्मार्ट

-पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय और स्मार्ट बाइक करती है यहां आकर्षित -अॉनलाइन मिल जाती है पार्किंग की जानकारी   वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने देशभर में 100 स्मार्ट सिटी (smartcitydelhi) बनाने की घोषणा की गई थी। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (NDMC) इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। इसके तहत इस इलाके में स्वच्छ पेयजल के साथ, स्मार्ट सड़कें, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और इलाके का सुंदरीकरण किया जाना था। डिजीटल तकनीकी के सहारे यहां के निवासियों की जिंदगी को अासान बनाना था। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद एनडीएमसी ने यहां साईकिल किराये पर देने से लेकर, स्मार्ट एलईडी स्क्रीन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं को शुरू किया है। पर यह अभी आधा सफर है, पूरा सफर अभी बाकि है।   एनडीएमसी इलाके को स्वच्छता के लिए जाना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में यह अभी तक पहले स्थान पर नहीं आ पाया है। झुग्गी बस्तियों में अब भी गंदगी की समस्या है। इतना ही नहीं, कई झुग्गी बस्तियाें में अभी तक पानी की पाइप लाइन

एक पत्रकार की शादी का कार्ड

जैसा कि आपकों पता है कि गत वर्ष 26 नवम्बर 2015 को मेरी शादी हुई। वैसे तो हर प्रोग्राम में इंशान के खट्टे मीठे पल होते हैं। लेकिन बात जब शादी की हो तो केवल मीठे पल ही याद रखने चाहिए। क्योंकि दोस्तों का कहना है कि शादी के बाद खट्टे पल ही नजर आते हैं। हालांकि अभी तक तो जिंदगी बहुत सुंदर चल रही हैं। मैं और मेरी धर्मपत्नी नीलम एक दूजे से बहुत खुश है। यह तो रही शादी के बाद की बात अब आपकों शादी से पहले की ओर ले चलता हूं। शादी तय हो गई थी। परिवार की रजामंदी और मेरी पंसद से नीलम के साथ मेरा विवाह हुआ। वर्ष 2015 के 5 मार्च को हम दोनों ने एक दूसरे को पूर्वी दिल्ली के नीलम माता मंदिर में देखा था। और देखने के बाद मेरे परिवार और मुझे भी नीलम पंसद आ गई थी। इसके बाद शादी की तैयारियां शुरू हो गई थी। सबसे पहले की रस्म थी। रोके की रस्म । यह रस्म भी खूब धूमधाम से मनाई गई। मैं और मेरा परिवार नाते रिश्तेदारों के साथ 20 अप्रैल को नीलम के निवास पर गोद भराई अर्थात रोके की रस्म के लिए गए। यहां हम दोनों ने समाज के सामने एक दूजें को अगुठियां पहना कर अपना लिया। इसके बाद बातों का सिलसिला चला और शादी की त