Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2014

गर्मी में सेहत बिगाड़ सकते हैं कटे फल और जूस

- उल्टी , दस्त , डायरिया , पीलिया होने का बड़ा खतरा - पूरे शहर में बड़ी कटे फल बेचने वालों की संख्या - कटे फल और खुला जूस बेचने पर हैं पांबदी नई दिल्ली २५ अप्रैल () गर्मी आते ही शरीर में पानी मांग बढ़ जाती है। पानी की मांग बढ़ने से सफर के दौरान जूस पीने की इच्छा होना स्वाभाविक है। इसी को देखते हुए गर्मी आते ही शहर की प्रमुख बाजारों या भीड़ भाड़ वाले इलाकों में फल की चाट और गन्ने की जूस की बिक्री बढ़ जाती है। इसलिए अक्सर जब हम सफर कर रहे होते हैं तो बस या मैट्रो से उतरने के बाद सड़क किनारे फल की दुकान से चाट का स्वाद लेने में पीछे नहीं रहते हैं। लेकिन यह स्वाद आपको भारी पड़ सकता है। क्योंकि विशेषज्ञों की राय हैं कि यह कटे फल और गन्ने का जूस आपकी सेहत को न केवल नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि भारी परेशानी में भी डाल सकता है। घर से खाकर और पानी लेकर निकले साथ दिल्ली मैडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ अनिल बंसल इस गर्मी के मौसम में विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह देते है। डॉ बंसल का कहना है कि गर्मी में सड़क किनारे कटे फल और गन्ने का जूस पीने से परहेज करना चाहिए। फुटपाथ पर लगे गन

विश्व मलेरिया दिवस...छोटा डंक और बड़ा खतरा

मलेरिया के खिलाफ लड़ाई के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की बड़ी मात्रा में निवेश की अपील नई दिल्ली २४ अप्रैल (निहाल सिंह) एक तुच्छ-सा   दिखने वाला जीवाणु का मामूली रूप से काटा जाना किसी की जिंदगी को भीषण खतरे में डाल सकता है। मच्छर जैसे जीवों के काटने से होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक ढंग से बढ़ रही है। अत्यधिक तापमान और अधिक नमी की ऊष्णकटिबंधीय स्थितियों में मनुष्य को गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया के उन्मूलन के लिए सरकारों , कोरपोरेट सेक्टर एवं विकास भागीदारों से ज् Þ यादा से ज् Þ यादा निवेश करने के लिए अपील करते हुए कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र , जहां दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है , में हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर हैं। हालांकि मलेरिया के मामलों की संख्या जो 2000 में 29 लाख थी , वह 2012 में कम हो कर 20 लाख के आंकड़े पर आ गई है , फिर भी यह बीमारी यहां के लोगों के जीवन के लिए एक बड़ा ख

मुफ्त इलाज से पहले ही कट जाती है मरीजों की जेब

-इलाज मुफ्त पर पार्किंग शुल्क से परेशान रहते है मरीज - अस्पतालों के बाहर पार्किंग शुल्क से परेशान मरीज - घंटे के हिसाब से लिया जाता है पार्किंग शुल्क नई दिल्ली २६ अप्रैल (निहाल सिंह) दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज देने के बावजूद मरीजों की जेब काटी जा रही है। इलाज शुरु होने से पहले ही मरीजों को अस्पताल में दाखिल होने का शुल्क चुकाना पड़ता है। यमुनापार के अस्पतालों में पार्किंग के नाम पर मरीजों से समय-सीमा के तहत पैसे वसूले जा रहे हैं। गुरूतेग बहादुर (जीटीबी) और हेडग़ेवार आरोग्य संस्थान में भले ही मुफ्त इलाज की सुविधा है , लेकिन मरीजों को पार्किंग के लिए दस रुपए से लेकर पचास रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह राशि तब दोगुनी हो जाती   है जब अस्पताल के आस- पास स्थित दवा की दुकानों में मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाईयां नहीं मिलती। चुनकर उठाकर ले जाते हैं वाहनपूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार गुरूतेग बाहदुर और हेड़गेवार आरोग्य संस्थान में पार्किंग शुल्क परेशानी का सबब बना हुआ है। इन अस्पतालों में अगर मरीज या उनके रिश्तेदार पार्किंग शुल्क न दे तो

नवोदय टाइम्स