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Showing posts from 2014

भाई कोई मरे तो मुझे जरुर बताना

- चुनावी तिकड़म के चलते शमशान घाटों और जागरणों में हाजिरी लगा रहे हैं नेताजी - रोजाना 4-5 क्रियाओं में शामिल होने लगे नेताजी - विधानसभा लडऩे के लिए स्थानीय लोगों को जोडऩे की नई तिकड़म अपना रहे हैं दिल्ली के नेता नई दिल्ली, (निहाल सिंह): दिल्ली में चुनावों की आहट के साथ ही, नेताजी इलाके में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, हालात यह हैं कि नेताजी ने अपने चंपूओं को आदेश दिया है कि इलाके में किसी की भी मृत्यु होने पर उन्हें तुरन्त बताया जाए। नेताजी किसी की मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरन्त शोक स्थल पर जा बैठते हैं। सूत्रों की मानें तो इसके लिए नेताजी बकायदा अपना भेष भी कुछ ऐसा बनाते हैं, कि शोकाकुल परिवार को लगे की जैसे नेताजी खबर मिलते ही सबसे पहले उनके ही घर आ गए हैं। चुनाव से पहले अपने आकाओं के सामने हाजिरी लगाने वाले नेता अचानक से अर्थियों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं। आलम यह है कि नेताजी सुबह शाम शमशान घाटों, कब्रिस्तानों में नजर आने लगेे हैं। भाजपा, कांग्रेस सहित आम आदमी पार्टी  के नेता भी इस चुनावी तिकड़म को भिड़ा रहे हैं। कहीं-कहीं तो चौंकाने वाली स्थिति नजर जाती है। आमतौर पर कई चक्

पंजाब केसरी

पंजाब केसरी में कुछ क्लीपिंग नवम्बर और दिसंबर माह की

नमस्कार यह घोषणा ट्रेड फेयर आए लोगों के लिए है

-     28 साल से बिछड़े हुए लोगों को मिला रही हैं संध्या -     मेले में महिलाओं ने भी संभाल की कमान -     दो लाख लोग पहुंचे प्रगति मैदान -     तकनीक से बदली मेले की तस्वीर नई दिल्ली (निहाल सिंह) नमस्कार यह धोषणा फलानी जगह से आए फलाने व्यक्ति के लिए है। एक बच्चा अपना नाम नहीं बता पा रहा है,लेकिन उसने नीले रंग की ड्रेस पहन रखी है, उसके साथ आए परिजन कृपया केन्द्रीय सूचना केन्द्र पर संपर्क करे। ऐसी ही कुछ घोषणाएं आपने ट्रेड फेयर में सुनी होगी। यह घोषणा कोई और नहीं संध्या करती है। पिछले 28 सालों से वह ट्रेड फेयर में बिछड़े लोगों को मिलाने का काम करती आ रही है। संध्या रॉय का कहना है कि वैसे तो यह उनका काम हैं, लेकिन काम में लोगों के चेहरे पर मुस्कान आने से जो सुकुन दिल को मिलता है शायद ही किसी ओर को मिले। उनका कहना है कि वह कई सालों से ट्रेड फेयर में काम कर रही हैं , लेकिन आज तक उन्होंने ट्रेड फेयर कभी पूरा नहीं घूमा। क्योंकि उनकी  डूयटी ही ऐसी है। हर साल 14-27 नवंबर तक उनका काम यहां रहता हैं पर पूरा घूमने का मौका नहीं मिला। छोटे बच्चों के मिलाना सबसे कठिन काम संध्या की

औके टाटा ओटोग्राफ

करीब दस साल पहले मैं नोएडा के लक्ष्मी स्टूडियों अपने एक गांव के भईया के माध्यम से गया था।  भईया उस स्टूडियों में इलैक्टीशन थे, जब भी कोई नई सूटिंग स्टूडियों में होती थी तो वो बारी-बारी से हमारे रिश्तोंदारों के हर बच्चें को लेकर जाते थे। एक बार ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी एक कार्यक्रम की शूटिंग के लिए आने वाली थी। उस दिन मेरा नंबर था तो भईया स्टूडियों ले गए। किसी कारण से हेमा मालिनी के कार्यक्रम को देर हो गई तो भईया ने शेखर सुमन के एक बाल शो की शूटिंग मैं मुझे बैठा दिया। बड़ा दिलचस्प अनुभव था। शूटिंग खत्म होने से पहले ही भईया ने मुझे स्टूडियों के  दरवाजे के बाहर खड़ा कर दिया क्योंकि जैसे ही शूटिंग खत्म हुई भीड़ से बचने के लिए शेखर सुमन दरवाजे से बाहर निकले और फिर भईया के ईशारे पर मैंने उन्हें पकड़ लिया और हाथ मिलाया। हाथ मिलाकर खुशी हुई पर अब मैने सोचा कि घर पर सबकों कैसे बताऊंगा कि मैं किससे मिला तो भईया ने बताया कि अब एक घंटे बाद फिर से दूसरी शूटिंग हैं उसमें शेखर सुमन आए तो ओटोग्राफ ले लेना। उन्होंने  तीन रूपए वाली एक साधारण सी डायरी अपनी जेब से निकाली और ओटोग्राफ लेने के लिए फिर से स्ट

नवोदय टाइम्स

सिर्फ कॉलोनियों में ही दौड़ पाएगा ई रिक्शा - मेट्रो स्टेशन से 25 मीटर पहले उतरानी होगी सवारी - 12 जोन में अलग- अलग नम्बर की होगी सिरिज - घर पर ही करनी होगी चार्जिंग, निगम ने तैयार की ई रिक्शा पर पॉलिसी नई दिल्ली 11 अगस्त (निहाल सिंह) गाइडलाइन न होने की वजह सें ई रिक्शा पर लगी रोक को हटवाने के लिए निगम ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। निगम ने ई रिक्शा पर पॉलिसी तैयार कर ली है। पॉलिसी के तहत अब ई रिक्शा सिर्फ कॉलोनियों में ही दौड़ सकेंगे। और मैट्रो स्टेशन के पास जाम न लगे इसलिए सवारी को स्टेशन से 25 मीटर दूर ही उतारना और चढ़ाना होगा। फिलहाल इस पॉलिसी को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी)तैयार कर रहा है, लेकिन तैयार होने के बाद तीनों निगमों में यही पॉलिसी मान्य होगी। एसडीएमसी  के नेता सदन सुभाष आर्य ने बताया कि निगम जल्द से जल्द ई रिक्शा वालों को राहत देने के कार्य में जुटी हुई है। इसी कार्य के तहत निगम अपनी पॉलिसी बना रही है। उन्होंने कहा तीनों निगमों के नेताओं और निगम आयुक्तों ने पॉलिसी के लिए सुझाए गए सुझावों पर अपनी सहमति दे दी है। आर्य ने कहा कि चूंकि ई रिक्

आस्था के रंग में डूबी राजधानी

महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र शुरू हो चुका है और इसे लेकर शहर के मंदिरों और बाजारों में खास चहल-पहल है। यह पर्व तीन देवियों- पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ विभिन्न रूपों की उपासना के लिए निर्धारित है, जिन्हें हम नवदुर्गा के नाम से जानते हैं। पहले के तीन दिन पार्वती के तीन स्वरूपों की, उसके बाद के तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरूपों की और अंत के तीन दिन सरस्वती माता के तीन स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस त्योहार के  दौरान मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है और उनमें खासी हलचल देखी जा सकती है। नवरात्र में और दिनों की अपेक्षा मंदिर के पट जल्दी खुल जाते हैं ताकि श्रद्दालु जितनी सुबह हो सके मां के दर्शन को जा सकें। मंदिरों में आज से भजन-कीर्तन का माहौल बना हुआ है और मां की आरती की विशेष तौर पर तैयारियां की गई हैं। शहर के बाजारों में भी नवरात्र के दौरान रौनक बनी रहेगी। दुकानदारों ने लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए खास तैयारियां कर ली हैं। नवरात्र शुरू हो चुका है और ऐसे में दिल्ली के हर मंदिर में हलचल बनी हुई है।  मंदिरों में आज लाखों की संया में श्रद्दालु जुटे और उन्होंने मां

सबसे आगे हम...

17 जून 2014 को नवोदय टाइम्स और 18 जून को नवभारत टाइम्स

गर्मी में सेहत बिगाड़ सकते हैं कटे फल और जूस

- उल्टी , दस्त , डायरिया , पीलिया होने का बड़ा खतरा - पूरे शहर में बड़ी कटे फल बेचने वालों की संख्या - कटे फल और खुला जूस बेचने पर हैं पांबदी नई दिल्ली २५ अप्रैल () गर्मी आते ही शरीर में पानी मांग बढ़ जाती है। पानी की मांग बढ़ने से सफर के दौरान जूस पीने की इच्छा होना स्वाभाविक है। इसी को देखते हुए गर्मी आते ही शहर की प्रमुख बाजारों या भीड़ भाड़ वाले इलाकों में फल की चाट और गन्ने की जूस की बिक्री बढ़ जाती है। इसलिए अक्सर जब हम सफर कर रहे होते हैं तो बस या मैट्रो से उतरने के बाद सड़क किनारे फल की दुकान से चाट का स्वाद लेने में पीछे नहीं रहते हैं। लेकिन यह स्वाद आपको भारी पड़ सकता है। क्योंकि विशेषज्ञों की राय हैं कि यह कटे फल और गन्ने का जूस आपकी सेहत को न केवल नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि भारी परेशानी में भी डाल सकता है। घर से खाकर और पानी लेकर निकले साथ दिल्ली मैडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ अनिल बंसल इस गर्मी के मौसम में विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह देते है। डॉ बंसल का कहना है कि गर्मी में सड़क किनारे कटे फल और गन्ने का जूस पीने से परहेज करना चाहिए। फुटपाथ पर लगे गन

विश्व मलेरिया दिवस...छोटा डंक और बड़ा खतरा

मलेरिया के खिलाफ लड़ाई के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की बड़ी मात्रा में निवेश की अपील नई दिल्ली २४ अप्रैल (निहाल सिंह) एक तुच्छ-सा   दिखने वाला जीवाणु का मामूली रूप से काटा जाना किसी की जिंदगी को भीषण खतरे में डाल सकता है। मच्छर जैसे जीवों के काटने से होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक ढंग से बढ़ रही है। अत्यधिक तापमान और अधिक नमी की ऊष्णकटिबंधीय स्थितियों में मनुष्य को गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया के उन्मूलन के लिए सरकारों , कोरपोरेट सेक्टर एवं विकास भागीदारों से ज् Þ यादा से ज् Þ यादा निवेश करने के लिए अपील करते हुए कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र , जहां दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है , में हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर हैं। हालांकि मलेरिया के मामलों की संख्या जो 2000 में 29 लाख थी , वह 2012 में कम हो कर 20 लाख के आंकड़े पर आ गई है , फिर भी यह बीमारी यहां के लोगों के जीवन के लिए एक बड़ा ख

मुफ्त इलाज से पहले ही कट जाती है मरीजों की जेब

-इलाज मुफ्त पर पार्किंग शुल्क से परेशान रहते है मरीज - अस्पतालों के बाहर पार्किंग शुल्क से परेशान मरीज - घंटे के हिसाब से लिया जाता है पार्किंग शुल्क नई दिल्ली २६ अप्रैल (निहाल सिंह) दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज देने के बावजूद मरीजों की जेब काटी जा रही है। इलाज शुरु होने से पहले ही मरीजों को अस्पताल में दाखिल होने का शुल्क चुकाना पड़ता है। यमुनापार के अस्पतालों में पार्किंग के नाम पर मरीजों से समय-सीमा के तहत पैसे वसूले जा रहे हैं। गुरूतेग बहादुर (जीटीबी) और हेडग़ेवार आरोग्य संस्थान में भले ही मुफ्त इलाज की सुविधा है , लेकिन मरीजों को पार्किंग के लिए दस रुपए से लेकर पचास रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह राशि तब दोगुनी हो जाती   है जब अस्पताल के आस- पास स्थित दवा की दुकानों में मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाईयां नहीं मिलती। चुनकर उठाकर ले जाते हैं वाहनपूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार गुरूतेग बाहदुर और हेड़गेवार आरोग्य संस्थान में पार्किंग शुल्क परेशानी का सबब बना हुआ है। इन अस्पतालों में अगर मरीज या उनके रिश्तेदार पार्किंग शुल्क न दे तो