Posts

Showing posts from May, 2013

एन्टी तंबाकू दिवस पर विशेष, दस में से पांच वयस्क घर पर अपरोक्ष धूम्रपान के शिकार

नई दिल्ली। निहाल सिंह ।। जब 65 वर्षीय सीमा को अपने फेफड़े के कैंसर के बारे में पता चला तो उनकी पूरी दुनिया बिखर गई। उनके लिए यह एक झटके के रूप में सामने आया खासकर तब जब कि वे धूम्रपान नहीं करती थी और एक स्वस्थ्य जीवन शैली का पालन कर रही थी। वह करीब 40 सालों से अपने पति के धूम्रपान की वजह से परोक्ष धूम्रपान का शिकार हो रही थी। बिना किसी गलती के यह महिला दर्दनाक किमियोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से गुजर रही हैं, लेकिन इस बिमारी के अंतिम चरण पर यह इलाज भी कोई बहुत ज्यादा प्रभावकारी नहीं होता है। आत्मग्लानि से ग्रस्त उनके पति ने धूम्रपान छोड़ दिया, लेकिन यह एहसास होने में बहुत देर लग गई। अगर उन्हें समय से यह एहसास हो जाता तो वे अपनी पत्नी को इस खतरनाक बीमारी से बचा लेते। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट के वरिष्ट ओंकोलॉजिस्ट डॉ उल्लास बत्रा कहते हैं कि यह कोई अकेला उदाहरण नहीं है, हम अक्सर ऐसे मामले देखते हैं, जो अक्सर अपरोक्ष धूम्रपान का परिणाम होते हैं। तंबाकू रहित दिवस मनाते हुए हमें न सिर्फ युवाओं को धुएं के खतरे से बचाना ही आवश्यक है, बल्कि इसे अगली पीढी में जाने से रोकना है। क्या है अपरोक्ष …

आईवीएफ तकनीक से अधिक उम्र में गर्भधारण पर लगे प्रतिबंध

आईवीएफ तकनीक से अधिक उम्र में गर्भधारण पर लगे प्रतिबंध नई दिल्ली,  । उत्तर प्रदेश की 68 वर्षीय ग्रामीण महिला, एक साथ तीन बच्चों को जन्म देने की वजह से सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में जहां एक तरफ आईवीएफ के द्वारा अधिक उम्र के बावजूद मां बन पाना एक वरदान साबित हुआ है वहीं इस उम्र में गर्भधारण करना कानूनी दिशा निर्देशों और होने वाले बच्चे के लिए कितना उचित है यह एक चिंता का विषय बना हुआ है। फार्टिस फेम अस्पताल की स्त्री रोग एवं बांझपन विशेषज्ञ डॉ़ ऋषिकेश पाई ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत के दौरान कहते हैं कि इस मामले में चिंताजनक विषय यह नहीं है कि अधिक आयु में गर्भ धारण कर पाने की संभावना कितनी अधिक है,बल्कि सोचने वाली बात यह है कि नैतिक रूप से यह कितना सही है। यह एक बहुत ही दुखद बात है कि किस प्रकार तकनीक के वरदान का दुरूपयोग करके इसको अभिशाप में बदला जा रहा है। इसलिए जरुरी है कि चिकित्सक और दंपति दोनों ही विज्ञान के द्वारा मिले विकल्पों का प्रयोग सहायता प्रजनन तकनीक के दिशा- निर्देशों के अनुसार कानूनी दायरे में रहते हुए ही करें,ताकि विज्ञान की यह देन वरदान की जगह अभिशाप न बन जाए।…

हीट स्ट्रोक हो सकता है जानलेवा: डॉ. अग्रवाल

हीट स्ट्रोक हो सकता है जानलेवा: डॉ. अग्रवाल नई दिल्ली। हार्ट केयर फांउडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक हीट स्ट्रोक का अगर समय रहते डायग्नाज और उपचार नहीं कराया गया तो यह जानलेवा हो सकता है। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक इस समय चल रही गर्मी में तापमान 45 डिग्री सेंटीर्गेड को पार कर चुका है जिससे आने वाले दिनों में हीट स्ट्रोक के मामलों में इजाफा हो सकता है। हीट स्ट्रोक इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी देर तक खुले आकाश में रहते है। इससे बचने के लोगों को पेय के रूप में नींबू नमक पानी और आम का पना पेय विकल्प के तौर पर लेना चाहिए। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक हीट स्ट्रोक के मरीजों में तेज बुखार, डीहाइड्रेशन और पसीना न निकलने जैसे लक्षण होते हैं। अक्सर ऐसी स्थिति में शरीर का तापमान 106 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाता है। व्यक्ति के शरीर का तापमान उसके निकलने वाले पसीने से नियंत्रित रहता है, जिससे गर्मी का अहसास नहीं होता है।लेकिन गर्मी के बढऩे के साथ अगर आपके शरीर से पसीना नहीं निकलता तो इससे गर्मी से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं जैसे कि, गर्मी से लू, तपिश और हीट स्ट्रोक की स्थिति आ …