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यकीन नहीं होता श्रीकांत जी जोशी नहीं हैं

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निहाल सिंह ।
मैं आज उस विषय पर लिख रहा हूं जिसके स्तर तक पहुंचने के लिए शायद मेरा पूरा जीवन लग जाये। फिर भी साहस कर रहा हूं लेकिन मेरे हाथ नहीं चल पा रहे हैं। मनः स्थिति यह है कि आखिर उस चरित्र को कहां से, किन शब्दों में और कैसे बयां करुं। लगभग छः माह पहले उन्होंने मुझे हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से अपने साथ काम करने का एक अवसर प्रदान किया। मेरे लिए यह पल सचमुच अविस्मरणीय व मुझे गौरवान्वित महसूस करवाने वाला था। यहां से मेरे जीवन में एक और नये पड़ाव की शुरुआत हुई और मैं इसमें आगे बड़ता चला गया। इस बीच बहुत कुछ घटा जिसे मैं आगे आप के साथ बाटूंगा लेकिन एक दिन अचानक तड़के-तड़के जब मेरी नींद पूरी तरह से खुली भी नहीं थी, एक खबर ने मुझे झकझोर कर रख दिया। मुझे यकीन नही हो पा रहा था कि मा. श्रीकांत जोशी जी हमें छोड़ कर जा चुके हैं।
मुझे याद है वह मंगलवार का दिन था। ठीक एक दिन पहले मैं अपने एक बेहद करीबी व वरिष्ठ व्यक्ति से मिलने दिल्ली स्थित पटेल नगर गया था। रात्रि में हुई हम दोनों की चर्चा में उस महान आत्मा का भी जिक्र आया। मुझे उस पल कतई  भी इस बात का एहसास नहीं था कि कल कुछ अनहोनी होने वाली…