Skip to main content

तन समर्पित मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित..



आज हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करने वाले मा. श्रीकांत जोशी जी की शोकसभा दिल्ली के कान्सूटूशन क्रल्ब में हुई.. वहां पर उनके साथ काम करने वाले कई वक्ताओं ने उनके साथ काम करने के अनुभव को साक्षा किया..
एक वक्ता ने कहा कि जब हिन्दुस्थान समाचार को पुनर्जिवित करने की बात हो रही थी तो हर छोटे से बड़े व्यक्ति व उनके सहयोगी इस पक्ष में नही थे कि हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित किया जाए, लेकिन मा. श्रीकांत जोशी जी ने सबको विश्वाश में लेकर हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करने के काम को शुरु किया..
साथ ही बता दू मा. श्रीकांत जोशी जी संघ के प्रचारक थे... संघ का प्रचारक, प्रचारक जीवन में फकीर की भांति होता है... ऐसे में मां श्रीकांत जोशी जी का हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करना वाकई तारीफ के काबिल है...
उनके इस काम के करने यह सीख मिलती है कि व्यक्ति चाहे कितना भी निर्धन हो लेकिन उसके मन में अगर कुछ करने का दृढ संकप हो तो व्यक्ति लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य करता है।
जय मां भारती

Comments

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर
में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...
 जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे
 में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..
धन्यवाद 
निहाल सिंह
E- MAIL- nspalsingh@gmail.com



CURRICULUM VITAE
NIHAL SINGH   Mobile: 0 E-Mail: nspalsingh@gmail.com.
Blog 
: aatejate.blogspot.com.
Career Objectives:-
Looking for a position in a result-oriented organization where acquired skills and education will be utilized towards continuous growth and advancement and…

दैैनिक जागरण

एक पत्रकार की शादी का कार्ड

जैसा कि आपकों पता है कि गत वर्ष 26 नवम्बर 2015 को मेरी शादी हुई। वैसे तो हर प्रोग्राम में इंशान के खट्टे मीठे पल होते हैं। लेकिन बात जब शादी की हो तो केवल मीठे पल ही याद रखने चाहिए। क्योंकि दोस्तों का कहना है कि शादी के बाद खट्टे पल ही नजर आते हैं। हालांकि अभी तक तो जिंदगी बहुत सुंदर चल रही हैं। मैं और मेरी धर्मपत्नी नीलम एक दूजे से बहुत खुश है। यह तो रही शादी के बाद की बात अब आपकों शादी से पहले की ओर ले चलता हूं। शादी तय हो गई थी। परिवार की रजामंदी और मेरी पंसद से नीलम के साथ मेरा विवाह हुआ। वर्ष 2015 के 5 मार्च को हम दोनों ने एक दूसरे को पूर्वी दिल्ली के नीलम माता मंदिर में देखा था। और देखने के बाद मेरे परिवार और मुझे भी नीलम पंसद आ गई थी। इसके बाद शादी की तैयारियां शुरू हो गई थी। सबसे पहले की रस्म थी। रोके की रस्म । यह रस्म भी खूब धूमधाम से मनाई गई। मैं और मेरा परिवार नाते रिश्तेदारों के साथ 20 अप्रैल को नीलम के निवास पर गोद भराई अर्थात रोके की रस्म के लिए गए। यहां हम दोनों ने समाज के सामने एक दूजें को अगुठियां पहना कर अपना लिया। इसके बाद बातों का सिलसिला चला और शादी की तैयारिया श…