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Showing posts from 2013

त्रिलोक पुरी विधानसभा वॉच

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विधानसभा वॉच कौंडली

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विधानसभा वॉच

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नवोदय टाइस्म खबर , बाय लाइन

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19-08-2013

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टूंडा पर अनछुए पहलुओं पर उजागर करती रिपोर्ट

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विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष : जनसंख्या नियत्रण पर फेल है लाल फीताशाही

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विशेष रिपोर्ट : निहाल सिंह नई दिल्ली, 10 जुलाई  मनुष्य को छोड़कर दूसरे किसी भी प्रजाति के जीवों की आबादी को नियंत्रित करने की जरुरत नहीं होती है। उनकी आबादी को प्रकृति खूद नियंत्रित रखती है,लेकिन मानव जैसे-जैसे विकास की सीढ़िया फर्लांगते जा रहा है और असाध्य बीमारियों पर काबू पाते जा रहा है वैसे-वैसे आबादी भी बढ़ते जा रही है। एक दौर था जब किसी महामारी का प्रकोप होता था तो गांव-गांव की आबादी लुप्त हो जाती थी। एक तरह से मानव की तरक्की ही प्रकृति के संतुलन पर भारी पड़ रहा है। चीन ने अपने यहां सख्त कानून बनाकर काफी हद तक अपनी आबादी को काबू कर रखा है,लेकिन भारत के संदर्भ में जब बात विश्व जनसंख्या की आती है तो दिन दोगुना रात चौगुनी की कहावत भी कम पड़ जाती है। आज विश्व जनसंख्या का विस्फोट इस तरह दुनिया पर भारी पड़ रहा है,जिसकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती। प्रति मिनट 25 बच्चे होते हैं पैदा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) की वरिष्ठ गायनिकोलॉजिस्ट डॉ अलका कृपलानी कहती हैं कि आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि अकेले भारत में प्रति मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं। यह आंकड़ा वह है जो बच्चे अस्पतालों में …

फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज,बन सकता है जिंदगी भर का दर्द

निहाल सिंह । नई दिल्ली। युवा कामकाजी प्रोफेशनल 25 वर्षीय प्रिया कुकरेजा ने इस उम्र में अप्रत्याशित स्वास्थ्य समस्या के बारे में कभी नहीं सोचा था जब तक कि वह दुर्घटनावश बर्फ पर फिसल नहीं गई और उसकी कोहनी टूट नहीं गई। प्रिया ने इसे हल्के में लिया। शुरु में दर्द नहीं हुआ,लेकिन बाद में टूटी हड्डी की जगह सूजन आने से परेशानी बढ़ गई। जबतक वह आर्थोपेडिक डॉक्टर के पास गई तबतक नुकसान हो चुका था। उसके कोहनी में हड्डी गलत जगह से जुड़ने की वजह से उसके हाथ टेढ़े हो गए। जब इस युवा महिला की जांच की गई तो एक्स-रे में हड्डी के कई टुकड़े के साथ जटिल फ्रैक्चर पाया गया। उसकी दाहिनी कोहनी में दर्द, सूजन भी थी और उसे हिलाना- डुलाना मुश्किल था। उसकी कोहनी का एक जटिल अपरेशन किया गया और हड्डी के टुकड़ों को विशेष  प्लेट और स्क्रू से फिक्स किया गया। इस प्रक्रिया के तीन महीने बाद, वह अब सामान्य रूप से अपने हाथ को हिलाने - डुलाने में सक्षम है। यदि समय रहते इलाज किया जाता तो प्रिया को इतना परेशान होने की जरुरत नहीं थी। फ्रैक्चर को न लें हल्के में फोर्टिस अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग के अध्यक्ष डॉ जीके अग्रवाल कहते …

एन्टी तंबाकू दिवस पर विशेष, दस में से पांच वयस्क घर पर अपरोक्ष धूम्रपान के शिकार

नई दिल्ली। निहाल सिंह ।। जब 65 वर्षीय सीमा को अपने फेफड़े के कैंसर के बारे में पता चला तो उनकी पूरी दुनिया बिखर गई। उनके लिए यह एक झटके के रूप में सामने आया खासकर तब जब कि वे धूम्रपान नहीं करती थी और एक स्वस्थ्य जीवन शैली का पालन कर रही थी। वह करीब 40 सालों से अपने पति के धूम्रपान की वजह से परोक्ष धूम्रपान का शिकार हो रही थी। बिना किसी गलती के यह महिला दर्दनाक किमियोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से गुजर रही हैं, लेकिन इस बिमारी के अंतिम चरण पर यह इलाज भी कोई बहुत ज्यादा प्रभावकारी नहीं होता है। आत्मग्लानि से ग्रस्त उनके पति ने धूम्रपान छोड़ दिया, लेकिन यह एहसास होने में बहुत देर लग गई। अगर उन्हें समय से यह एहसास हो जाता तो वे अपनी पत्नी को इस खतरनाक बीमारी से बचा लेते। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट के वरिष्ट ओंकोलॉजिस्ट डॉ उल्लास बत्रा कहते हैं कि यह कोई अकेला उदाहरण नहीं है, हम अक्सर ऐसे मामले देखते हैं, जो अक्सर अपरोक्ष धूम्रपान का परिणाम होते हैं। तंबाकू रहित दिवस मनाते हुए हमें न सिर्फ युवाओं को धुएं के खतरे से बचाना ही आवश्यक है, बल्कि इसे अगली पीढी में जाने से रोकना है। क्या है अपरोक्ष …

आईवीएफ तकनीक से अधिक उम्र में गर्भधारण पर लगे प्रतिबंध

आईवीएफ तकनीक से अधिक उम्र में गर्भधारण पर लगे प्रतिबंध नई दिल्ली,  । उत्तर प्रदेश की 68 वर्षीय ग्रामीण महिला, एक साथ तीन बच्चों को जन्म देने की वजह से सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में जहां एक तरफ आईवीएफ के द्वारा अधिक उम्र के बावजूद मां बन पाना एक वरदान साबित हुआ है वहीं इस उम्र में गर्भधारण करना कानूनी दिशा निर्देशों और होने वाले बच्चे के लिए कितना उचित है यह एक चिंता का विषय बना हुआ है। फार्टिस फेम अस्पताल की स्त्री रोग एवं बांझपन विशेषज्ञ डॉ़ ऋषिकेश पाई ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत के दौरान कहते हैं कि इस मामले में चिंताजनक विषय यह नहीं है कि अधिक आयु में गर्भ धारण कर पाने की संभावना कितनी अधिक है,बल्कि सोचने वाली बात यह है कि नैतिक रूप से यह कितना सही है। यह एक बहुत ही दुखद बात है कि किस प्रकार तकनीक के वरदान का दुरूपयोग करके इसको अभिशाप में बदला जा रहा है। इसलिए जरुरी है कि चिकित्सक और दंपति दोनों ही विज्ञान के द्वारा मिले विकल्पों का प्रयोग सहायता प्रजनन तकनीक के दिशा- निर्देशों के अनुसार कानूनी दायरे में रहते हुए ही करें,ताकि विज्ञान की यह देन वरदान की जगह अभिशाप न बन जाए।…

हीट स्ट्रोक हो सकता है जानलेवा: डॉ. अग्रवाल

हीट स्ट्रोक हो सकता है जानलेवा: डॉ. अग्रवाल नई दिल्ली। हार्ट केयर फांउडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक हीट स्ट्रोक का अगर समय रहते डायग्नाज और उपचार नहीं कराया गया तो यह जानलेवा हो सकता है। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक इस समय चल रही गर्मी में तापमान 45 डिग्री सेंटीर्गेड को पार कर चुका है जिससे आने वाले दिनों में हीट स्ट्रोक के मामलों में इजाफा हो सकता है। हीट स्ट्रोक इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी देर तक खुले आकाश में रहते है। इससे बचने के लोगों को पेय के रूप में नींबू नमक पानी और आम का पना पेय विकल्प के तौर पर लेना चाहिए। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक हीट स्ट्रोक के मरीजों में तेज बुखार, डीहाइड्रेशन और पसीना न निकलने जैसे लक्षण होते हैं। अक्सर ऐसी स्थिति में शरीर का तापमान 106 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाता है। व्यक्ति के शरीर का तापमान उसके निकलने वाले पसीने से नियंत्रित रहता है, जिससे गर्मी का अहसास नहीं होता है।लेकिन गर्मी के बढऩे के साथ अगर आपके शरीर से पसीना नहीं निकलता तो इससे गर्मी से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं जैसे कि, गर्मी से लू, तपिश और हीट स्ट्रोक की स्थिति आ …

INDIA MUST LOOK NORTH-EAST

Monday, 01 April 2013 | KG Suresh | 
The reason why the legendary freedom-fighter from Meghalaya, U Kiang Nanbah, is an unknown figure for the rest of the country is that we are so poorly informed about the history and culture of the Seven Sisters At the first instance, the name struck as perhaps one of some South East Asian political leader. It was later one realised that he was one of the greatest freedom-fighters this country has produced. Unfortunately, not only in the rest of the country but even in his own native Meghalaya, U Kiang Nanbah is not a well-known figure, thanks to a policy of sheer indifference successive Central Governments have adopted towards the history and culture of the people of the North-East, Remembering Nanbah now assumes all the more significance as 2013 marks 150 years of his execution at the hands of the British rulers. Not much is known about his early days except that he was a child when the British annexed the Jaintia kingdom in 1835. He had no royal lin…

यकीन नहीं होता श्रीकांत जी जोशी नहीं हैं

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निहाल सिंह ।
मैं आज उस विषय पर लिख रहा हूं जिसके स्तर तक पहुंचने के लिए शायद मेरा पूरा जीवन लग जाये। फिर भी साहस कर रहा हूं लेकिन मेरे हाथ नहीं चल पा रहे हैं। मनः स्थिति यह है कि आखिर उस चरित्र को कहां से, किन शब्दों में और कैसे बयां करुं। लगभग छः माह पहले उन्होंने मुझे हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से अपने साथ काम करने का एक अवसर प्रदान किया। मेरे लिए यह पल सचमुच अविस्मरणीय व मुझे गौरवान्वित महसूस करवाने वाला था। यहां से मेरे जीवन में एक और नये पड़ाव की शुरुआत हुई और मैं इसमें आगे बड़ता चला गया। इस बीच बहुत कुछ घटा जिसे मैं आगे आप के साथ बाटूंगा लेकिन एक दिन अचानक तड़के-तड़के जब मेरी नींद पूरी तरह से खुली भी नहीं थी, एक खबर ने मुझे झकझोर कर रख दिया। मुझे यकीन नही हो पा रहा था कि मा. श्रीकांत जोशी जी हमें छोड़ कर जा चुके हैं।
मुझे याद है वह मंगलवार का दिन था। ठीक एक दिन पहले मैं अपने एक बेहद करीबी व वरिष्ठ व्यक्ति से मिलने दिल्ली स्थित पटेल नगर गया था। रात्रि में हुई हम दोनों की चर्चा में उस महान आत्मा का भी जिक्र आया। मुझे उस पल कतई  भी इस बात का एहसास नहीं था कि कल कुछ अनहोनी होने वाली…

आज नींद अचानक क्यों टूट गयी..

आज पता नही क्यों पर मेरी आंख रात्रि के समय दो बजे ही खुल गयी। मुझे भी समझ नही आ रहा क्यों आज मुझे नींद नही आ रही है। लेटे हुए दिमाग इधर-उधर धूमने लगा की आखिर आज नींद यू अचानक कैसे टूट गयी। ऐसा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जब हुआ करता है जब कोई अपना नजदीकी या तो संकट मैं होता है या फिर कुछ गलत होने वाला होता है। अब तो बस प्रभु मालिक है कि आज एकदम अचानक नींद क्यों टूटी  । इस नींद टूटने के कारण जो भी हो लेकिन एक बात मेरे मस्तिष्क में गोल-गोल धूम रही है कि मैं कुछ ज्यादा ही भावनाओं बह जाता हूं। कभी-कभी यह भी सोचता हूं कि मैं इस तरीके  लोगों के सामने राष्टवादी विचारों को रखता हू तो कही उनको यह न लगता हो कि यह तो मूर्ख है कुछ ज्यादा ही भावनाओं में संवेदनशील हो जाता है। बहरहाल जो भी मैं जिस विचार का समर्थक हू और जहां तक उन विचारों के मै अभी तक समझ पाया हू उन विचारों को जन्म देने वाले गौरवशाली व्यक्तियों ने कभी इस बात की परवाह नही की लोग आपके राष्ट के हित मैं किए गए काम को लेकर क्या सोचते है। उन्होनें तो सिर्फ इस बात की परवाह की किस तरह ज्यादा-ज्यादा से सनातनी का भला हो।

तन समर्पित मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित..

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आज हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करने वाले मा. श्रीकांत जोशी जी की शोकसभा दिल्ली के कान्सूटूशन क्रल्ब में हुई.. वहां पर उनके साथ काम करने वाले कई वक्ताओं ने उनके साथ काम करने के अनुभव को साक्षा किया.. एक वक्ता ने कहा कि जब हिन्दुस्थान समाचार को पुनर्जिवित करने की बात हो रही थी तो हर छोटे से बड़े व्यक्ति व उनके सहयोगी इस पक्ष में नही थे कि हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित किया जाए, लेकिन मा. श्रीकांत जोशी जी ने सबको विश्वाश में लेकर हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करने के काम को शुरु किया.. साथ ही बता दू मा. श्रीकांत जोशी जी संघ के प्रचारक थे... संघ का प्रचारक, प्रचारक जीवन में फकीर की भांति होता है... ऐसे में मां श्रीकांत जोशी जी का हिन्दुस्थान समाचार को पुर्नजिवित करना वाकई तारीफ के काबिल है... उनके इस काम के करने यह सीख मिलती है कि व्यक्ति चाहे कितना भी निर्धन हो लेकिन उसके मन में अगर कुछ करने का दृढ संकप हो तो व्यक्ति लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य करता है। जय मां भारती

हिन्दुस्थान समाचार के संरक्षक श्रीकांत जोशी का मुंबई में निधन

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नयी दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। हिन्दुस्थान समाचार के संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री श्रीकान्त जोशी जी का आठ जनवरी को प्रातः पांच बजे मुंबई में निधन हो गया। वह 76 साल के थे। श्री जोशी पिछले कई दिनों से स्वशन संबंधी बिमारी से पीड़ित थे। मंगलवार सुबह सीने में दर्द होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, जहां रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गयी। श्री जोशी के निधन से हिन्दुस्थान समाचार सहित आरएसएस को गहरी छति पहुंची है। उनके निधन पर आरएसएस, भाजपा सहित कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से शोक व्यक्त किया। कुछ दिन पहले श्री जोशी को चिकित्सा के लिये केरल गये थे। उसके बाद नागपुर में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था जहां सभी रिपोर्ट सामान्य बताई गयी थी। अभी दो दिन पहले ही श्री जोशी विश्राम के लिये दो दिन पहले ही दिल्ली से मुम्बई पहुंचे थे। मंगलवार सुबह सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गयी। मुम्बई के पितृछाया संघकार्यालय में उनके पार्थिव शरीर को अन्तिम दर्शन के लिये रखा गया है। दाह संस्कार आज ही सायं चार बजे मुम्बई में ही होगा। संक्षिप्त जीवन परिचय श्र…