Skip to main content

मन करता है कुछ लिखू



मन करता है कुछ लिखू 
फिर सोचता हु की क्या लिखू
उनके लिए लिखू जिन्हें सुबह के खाने क बाद शाम के खाने का पता नहीं होता 
या उनके लिए लिखू जो जिन्हें सुबह खाने के बाद शाम का खाना पहेले से ही उनका इन्तजार करता है|||||
फिर मन करता है की कुछ लिखू 
की सोचता हु की ऐसा लिखू की
 शायद इस देश में  ऐसा हो जाये 
रात को कोई माँ और उसका बच्चा भूखा न सो जाये |||
जिसके वजह से माँ की आँख में अपने लाल के लिए कभी आशु न आये 
मन करता है की कुछ लिखू 
फिर सोचता हु की क्या लिखू 
ऐसा लिखू जो दूसरो के काम आये 
या ऐसा लिखू जो इतिहास बन जाये ||
मन करता है की कुछ लिखू 
फिर सोचता हु की क्या लिखू 
फिर थोड़ी ख़ुशी आती और मन कहता है 
कोई तो  आये जो मेरे मन को समझाये |||
की दिल की बात दिल में न रह जाये 
अभी समय है पता नहीं कल आये या न आये
कल ईशवर ने तुजे बुला लिया तो 
कही धरती पर आने  का मकशद  पूरा हो पाए 
और फिर आने वाले सालों में कई माँ कही बुखी न सो जाये |||
मन करता है कुछ  लिखू 
की सभी ऐसे बन जाए  की की कोई किसी निर्बल पर हावी न हो पाए ||||
मन कहता है की तू लिख जो 
और तू कर भलाई 
और तेरी सुनेगा कोई हिन्दुस्तानी भाई |||||
आएगी तेरी किस्मत में ऐसी खुसिया 
जो पहेले ही लिखी जा चुकी है
और होगा भला जो तू करेगा भला 
बस इतनी सी बात ,,,,,,,,,, थी मेरे मन में 
जो मेने आपसे कह दी है.........................




Comments

Popular posts from this blog

एक पत्रकार की शादी का कार्ड

जैसा कि आपकों पता है कि गत वर्ष 26 नवम्बर 2015 को मेरी शादी हुई। वैसे तो हर प्रोग्राम में इंशान के खट्टे मीठे पल होते हैं। लेकिन बात जब शादी की हो तो केवल मीठे पल ही याद रखने चाहिए। क्योंकि दोस्तों का कहना है कि शादी के बाद खट्टे पल ही नजर आते हैं। हालांकि अभी तक तो जिंदगी बहुत सुंदर चल रही हैं। मैं और मेरी धर्मपत्नी नीलम एक दूजे से बहुत खुश है। यह तो रही शादी के बाद की बात अब आपकों शादी से पहले की ओर ले चलता हूं। शादी तय हो गई थी। परिवार की रजामंदी और मेरी पंसद से नीलम के साथ मेरा विवाह हुआ। वर्ष 2015 के 5 मार्च को हम दोनों ने एक दूसरे को पूर्वी दिल्ली के नीलम माता मंदिर में देखा था। और देखने के बाद मेरे परिवार और मुझे भी नीलम पंसद आ गई थी। इसके बाद शादी की तैयारियां शुरू हो गई थी। सबसे पहले की रस्म थी। रोके की रस्म । यह रस्म भी खूब धूमधाम से मनाई गई। मैं और मेरा परिवार नाते रिश्तेदारों के साथ 20 अप्रैल को नीलम के निवास पर गोद भराई अर्थात रोके की रस्म के लिए गए। यहां हम दोनों ने समाज के सामने एक दूजें को अगुठियां पहना कर अपना लिया। इसके बाद बातों का सिलसिला चला और शादी की तैयारिया श…

दैैनिक जागरण

RTI FORMAT- आरटीआई प्रथम अपील के आवेदन का प्रारुप

मित्रों आप जब किसी विभाग में आरटीआई फाईल करे और आपको 30 दिनों के भीतर जवाब न मिलें तो आप इस तरह के प्रारुप का इस्तेमाल करके प्रथम अपील फाईल कर सकते है।
-------------------------------------------------------------------------
-- प्रारुप को देखने के बाद सुझाव आमत्रित है..
=================================================

सेवा में,                                                               दिनांक......................... प्रथम अपीलीय अधिकारी, .......विभाग का नाम और पता........................... .................................... विषय- सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19 के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी के समझ अपील। मान्यवर, मैने आपके कार्यलय में दिनांक ......................... को कुछ सूचनाओं के लिए आवेदन दिया था । मान्यवर आवेदन के संबध में सूचना अधिकारी महोदय द्वारा जो सूचनाए उपलब्ध कराई गयी है वह अधूरी व अस्पष्ट है। साथ ही इन सूचनाओं से मै संतुष्ठ नही हूं। कृपया करके मुझे स्पष्ट व पूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराने का कष्ट करें। मूल आवेदन की छाया प्रति संलग्न है।                                      …