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Showing posts from February, 2010

बुरा ना मानो महगाई है !

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होली आ गई है बाजारों में भीड़ पहेले की मुताबिक कम है क्योकि महगाई ने होली के रंगों को हल्का कर दिया है , इस बार होली का रंगों और पिचकारियो के आसमान छु चुके दामो ने लोगो के चेहरों के रंग उडा दिए है ......... भैया चारो तरफ महागाई है फिर कहा किसे सुध होली की आई है ????????????? इस मोके पर चार पंक्तिया पेश करने की मन में आई है होली आई है रंगों की महगाई ने वाट लगाईं है रंगों की पिचकारी भी चल रही है बिन पानी के क्योकि पानी के दाम बढने के बाद होली आई है चीनी के बड़े दामो से ....... गुजिया भी लग रही है फीकी पापड़ भी कच्चे खाने पढ़ जायेंगे क्योकि तेल बिन हम यही कर पाएंगे कैसे जायेंगे रिश्ते दारो के घर क्या पेट्रोल क्या शीला दीछित के चाचा भरवाएंगे प्रणव ने बजट में महगाई ही महगाई दिखाई है और इस बात के साबशी पाई है की उसकी सरकार फिर एक बार महगाई रोकने में नाकामयाब नजर आई है भैया हो जाओ तैयार फिर आम आदमी की सरकार आम आदमी को मरने को आई है क्योकि ये मुशीबत निहाल सिंह को सताई है इसलिए ये नै पोस्ट कर दी हमने भाई |

बेरोजगारी भुकमरी और मुग़ल गार्डेन

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मेरा पसंदीदा चिट्ठाजगत फीड कड़ी
अभी भारत के सबसे बड़ी हस्ती मानी जाने वाली जगह राष्ट्रपति भवन आम जनता के लिए खोला गया है , इस बात की खबर मिलते ही हम सभी क्लास वालों ने ये जगह देखने के लिए मुग़ल गार्डेन का प्लान बनाया इसके लिए तारिक तय हुई २३ फरबरी २०१० और इस दिन चल दिए हम मुग़ल गार्डेन के सफ़र के लिए दिल्ली की बसों में धाके खाते हुए और जेबकतरों से बचते हुए और थोड पैदल यात्रा के जरिये पहुच गए हम मुग़ल गार्डेन
वह जाकर हमने अपना सामान (मोबाइल और अन्य बस्तुये ) जमा करा के अंदर जाने की तैयारी की कतार बना के अन्दर पहुचे तो वहा का नजारा कुछ और ही था में तो दंग था की जिस देश में गरीब को रहने के लिए जगह नहीं है और जहा आम आदमी भुकमरी और बेरोजगारी से मर रहा है उस देश के रास्त्रपति भवन में आर्बो रुपया सालाना खर्च किया जाता है ५०० एकड़ में फैले इस गार्डेन पर भारी मात्रा में पैसा भाहाया जाता है , ,,,,,,,,,,,,,,,,,
लेकिन ऐसे गार्डेन का हम क्या करेंगे जिस से आम आदमी और देश के किसी व्यक्ति का कोई फ़ायदा नहीं होता लाखो रूपये तो उसकी देख रेख में खर्च हो जाते है,,,,,,,,,,,,,
अब घुमने समय में सबकी प्रतिकि…

4 साल बाद हम मर जायेंगे

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अभी हाल ही में शिवसेना के साथ विवादों से घिरी हुई फिल्म माय नेम इज खान इस फिल्म को शिवसेना ने इस फिल्म को खूब फ्री की पब्लिसिटी दिलाई खैर ,,,,,,,,,,,इस फिल्म में मधुमखियो को बचाने का भी सन्देश दिया गया है,,,,,,,,,,,,, हमारा मोबाइल जो हमारे पुरे दिन का एक हिस्सा बन गया है और जिसके बिना हम रह नहीं सकते वो इन मधुमखियो का यमराज साबित हो रहा है क्योकि इससे निकलने वाली किरने इन मधुमकियो का काल बनकर निकलती है जिससे ये मधुमखिया अपना रास्ता भटक जाती है और इन किरणों के जादा प्रभाव से वो हवा में ही दम तोड़ देती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, एक और एक चंडीगढ़ में हुए शोध से ये पाया गया है की जिस दिन देश में सारी मधुमखिया ख़तम हो जाएगी उसके ४ साल बाद हम मर जायेगे यानि अब जीना है तो जनाब हो सके तो हमारी दिनचर्या के हिसा बन चुके मोबाइल का उपयोग बंद कर दीजिये या हो सके तो इसका उपयोग कम कर दीजिये ,,,,,,,,,,,,,, वर्ना जनाब एक दिन वो आयेगा इस एक विज्ञापन तो मोबाइल कंपनी एयर सेल दे रही है की चीते को बचाओ फिर उसकी की तरह विज्ञापन ना देना पड़े तो जनाब कोशिस कीजये की घर पर लगे लैंडलाइन फोन का उपयोग क…

ये है कानून के रक्षक

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ये तस्वीर मौजपुर रोड की है जहा एक पुलिस वाला जो खुद कानून का रक्षक है वो इस तस्वीर में कानून का बक्षक नजर आ रहा है

वेलेंटाइन डे और मेरा जन्मदिन

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14 feb ये दिन मेरे से जुड़ा हुआ है क्योकि इस दिन मेरा जन्म दिन आता है लेकिन इस दिन के पीछे जो माना है की इस दिन दो प्यार करने वाले मिलते है और एक दुसरे से अपने प्यार का इजहार करते है, लेकिन सच माने तो ये सिर्फ वो ही लोग करते है जो पहेले से ही एक दुसरे को प्यार करते है ये मेरी अपनी सोच है इस दिन युवा वर्ग इस दिन को अपने से प्यार करने वाले से काफी उमीदे लगाये होते है लेकिन मेने आपको बताया की इस दिन मेरा जन्मदिन आता है लेकिन ये दिन को मेरे सात मानाने वाला यानि मुझसे प्यार करने वाला इंसान आज तक मुझे नहीं मिला शायद लोगो को मेरी बाते पसंद नहीं आती है, या शायद में ऐसी बाते नहीं करता या में और लोगो की तरह झूटी (गप्पे ) नहीं मर सकता हु चलो छोड़ो आप इन बातो को ध्यान मत दो अब में आपको hindisms.org के जरिये का वेलेंटाइन दिवस इतिहास बताता हु वेलेंटाइन दिवस रोमन साम्राज्य के समय में शुरू हुई.
IIn प्राचीन रोम, फ़रवरी 14 छुट्टियां मनाने के लिए जूनो सम्मान था. जूनो रोमन देवी देवताओं की रानी थी. रोम के लोगों ने भी उसे महिलाओं और शादी की देवी के रूप में जानता था. अगले दिन, फ़रवरी 15, Lupercalia का …

पुलिस की लापरवाही

हर इतवार की तरह में अपने दोस्त के साथ बहार गुमने गया यानि अपने ही इलाके में घूम रहा था तो, रस्ते में हम बाते करते हुए जा रहे थे और उधर से तरुण क पापा आ गए उनको देखकर हमने नमस्ते किया और अंकल जी सवाल किया की कहा जा रहे हो तो हमे बोला बस ऐसे ही घूम रहे है , ठीक है अंकल जी कह कर चल दिए घूमते-घूमते हम ब्लॉग पर और भ्रस्टाचार पर बाते कर रहे थे तबी हमारी नजर एक भीड़ पर पड़ी मेने अपने दोस्तों से उस भीड़ की वजह जानने की अनुमति ली और उस भीड़ में जाकर खड़ा हो गया वहा मेने देखा की एक महिला के साथ बदसलूकी की वजह से ये भीड़ लगी हुई है २ -४ लोगो को सुनने से पता चला की महिला अपनी ४ पहिये की कार को लेकर मार्केट आई हुई थी और उसने अपनी कार नो पार्किंग में लगाने की कोशिस कर रही थी तभी वहा से एक मोटर साइकिल सवार ने उसका विरोध किया तो महिला ने शेद्खानी के आरोप में पुलिस बुला ले क्योकि पुलिस बोथ पास में ही था तो पुलिस इस बार जल्दी पहुच गई और अब यहाँ पुलिस की करतूत तो देखिये पुलिस कर्मी एक दूसरी क्लास के बच्चे की कापी के एक तुकडे पर रिपोर्ट लिख रहे थे जैसे सरकार ने उनको सिर्फ ये ही मुहैया कराइ हो मेरा…