Skip to main content

नाले के रुप मे नदिया

नाले के रुप मे नदिया

यमुना नदी का नया नाम काली नदी !

आज देश में हर तरफ वायु मंडल गरम होने की बाते चल रही है | लेकिन एक तरफ माँ कही जाने ये नदिया गगा यमुना और आदि नदिया नाले की भाति दिखाई देती है क्योकि इनका पानी गंदे नाले की तरह दिखाई देता है ! एक समय था की नदियो के पास से गुजरने मात्र से मन को शांति मिलती थी और हम मन ही मन भगवान को याद करते थे लेकिन मन को शांत करने वाली ये नदिया
अब दुर्गंद देने लगी है अब इनके पास गुजरते समय मुह पर रुमाल लागये बिना नहीं रहा जाता है इसके पानी में से आने वाली सुगंद अब गंद का रूप ले चुकी है |इसलिए अब हम इसका नया नाम
काली नदी दे तो इसमें कोई परेशानी नहीं होगी क्योकि इसका पानी कला हो चूका है
अब इसमें जगह -जगह पन्नी कचरा आदि चीज़े बहती दिखाई देती नजर आ जाती है | कारण कई है लेकिन एक कारण हमने खुद ही बनया है वो कारण है आस्था का है | हम अपनी आस्था में इतने अंधे हो चुके है की हम अपनी माँ कही जाने वाली नदियो को अपवित्र और प्रधुषित` करने पर तुले हुए है हम आस्था के नाम पर धुपवती और मंदिरों में चढाई गई वस्तुए इसमें विसर्जित करते है इससे न केवल हम प्रधुषित कर रहे है बल्कि इससे हम खत्म भी कर रहे है |
एक और गिलेसियरो का पिगालना और दूसरी और इन नदियो का नाले रूप में परिवातित हो जाना ये धरती के विनाश के संकेत नजर आते है | हलाकि सरकार इन नदियो को साफ़ सुथरा रखने के लिए अरबो की राशी इन नदियो में बहा चुकी है और वादे हजार कर चुकी है लेकिन परिणाम हमेशा जीरो नजर आया है, कभी यमुना की सफाई २०१० तक और कभी यमुना की सफाई अब २०२० तक के वादे सुनाई देते है |न जाने ये नदिया कब फिर से
पुराने रूप में आएँगी और कब हम इन्हें गर्व से फिर से माँ कहेंगे
मेरे अनुसार नदियो की पवित्रता को बरकार रखने के ये उपाय कारागार साबित हो सकते है :-
# इसमें गिरने वाले नालो पर पाबंधी लगाई जाये |.
# अगर हम आस्था में अंधे हो चुके है तो नदियो के पास जहा से आधिक मात्रा में पूजा की वस्तुए विसर्जित की जाती है वहा पर विसर्जित वस्तुओं के लिए डिब्बे लगाये जाए |
# एक पेरामीटर बनाया जाये जिस राज्य से आधिक नदिया प्रधुषित होगी उन पर भरी जुरमाना लगाया जाये और कड़े निर्देश
जारी किये जाये |
# युमना सफाई प्लान को भ्रस्टाचार मुक्त किया जाये
# जब हम अरबो की राशी इसकी सफाई पर खर्च कर सकते है तो जैसे युमना का दिल्ली में इसथित पुल जैसी जगहों पर पुलिस कर्मी लगा सकते है और युमना में कूड़ा फैकने वालो को पकड़ सकते है |



मेने जिस समस्या जोर पर दिया शायद ये समस्या सबको कम महतवपूर्ण लगे लेकिन ये समस्या अपने आप में काफी गंभीर है क्योकि नदिया इसी तरह नाले की तरह दिखाई देने लगी तो एक दिन हम पानी पानी के लिए मोह्ताज हो जाएंगे ?

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मुझे नौकरी चाहिए ... क्या आप मेरी मदद करेंगे

प्रिय मान्यवर, बंधुवर में आपको सूचित कर रहा रहा हु कि  में निहाल सिंह मेने भीम राव अम्बेडकर कॉलेज से पत्रकारिता कि पढाई  को पूरा कर लिया हैं.. और आप अवगत होंगे कि हर विद्याथी को कॉलेज से निकलने क बाद एक नौकरी कि तलाश होती हैं.. इस तरह मुझे भी एक नौकरी कि तलाश हैं... आप पिछले लगभग दो वर्ष से मेरे व्यवहार से भी से भी अच्छी  तरह परिचित हो गये होंगे. और नौकरी किसी भी संस्थान में मिले चाहे और प्रिंट और चाहे और किसी में भी में तैयार हु. बस में किसी भी तरह  से शुरुवात  करना चाहता हु.  मुझे आशा हैं कि आप किसी न किसी रूप में मेरी मदद करेंगे ...  जब आपको लगे कि आप मेरी मदद कर सकते हैं तो कृपया मुझे बस एक फोन कॉल कर दे  में इस मेल के साथ अपना रिज्यूमे भी सेंड कर रहा हु  आप देख ले..   धन्यवाद  निहाल सिंह E- MAIL-  nspalsingh@gmail.com                    CURRICULUM VITAE NIHAL SINGH   M o b il e : 0 E - M a il : nspalsingh@gmail.com. Blog  : aatejate.blogspot.com.   Career Objectives:- Looking for a position in a result-oriented organization whe

दिल्ली वालों का दिल हुआ स्मार्ट

-पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय और स्मार्ट बाइक करती है यहां आकर्षित -अॉनलाइन मिल जाती है पार्किंग की जानकारी   वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने देशभर में 100 स्मार्ट सिटी (smartcitydelhi) बनाने की घोषणा की गई थी। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (NDMC) इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। इसके तहत इस इलाके में स्वच्छ पेयजल के साथ, स्मार्ट सड़कें, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और इलाके का सुंदरीकरण किया जाना था। डिजीटल तकनीकी के सहारे यहां के निवासियों की जिंदगी को अासान बनाना था। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद एनडीएमसी ने यहां साईकिल किराये पर देने से लेकर, स्मार्ट एलईडी स्क्रीन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं को शुरू किया है। पर यह अभी आधा सफर है, पूरा सफर अभी बाकि है।   एनडीएमसी इलाके को स्वच्छता के लिए जाना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में यह अभी तक पहले स्थान पर नहीं आ पाया है। झुग्गी बस्तियों में अब भी गंदगी की समस्या है। इतना ही नहीं, कई झुग्गी बस्तियाें में अभी तक पानी की पाइप लाइन

खबरों का संकलन 2019-2020